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टाटा के पास ही रहेगा ‘ताज’

दिल्ली के मशहूर होटल ताज मानसिंह पर टाटा समूह की इंडियन होटल्स कंपनी (आईएचसीएल) का नियंत्रण बरकरार रहेगा। ताज ब्रांड के होटलों का परिचालन करने वाली इस कंपनी को और 33 साल के लिए इसे चलाने का पट्टा मिल गया है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) द्वारा शुक्रवार को कराई गई ई-नीलामी में आईएचसीएल ने आईटीसी को पछाड़ते हुए ताज पर अपना कब्जा बरकरार रखा। हालांकि नीलामी के नतीजों की घोषणा शेयर बाजार में कारोबार बंद होने के बाद की गई लेकिन ऐसा लगता है कि आईएचसीएल के शेयर की कीमत की भी कंपनी की जीत में भूमिका रही। बंबई स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी का शेयर कारोबार के दौरान सात फीसदी तक चढ़ा और फिर पांच फीसदी बढ़त के साथ 135.45 रुपये पर बंद हुआ। ईआईएच और लेमन ट्री जैसी अन्य होटल कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

आईएचसीएल ने लाइसेंस फीस के रूप में प्रति महीने 7.03 करोड़ रुपये यानी होटल के सकल राजस्व का 32.5 फीसदी एनडीएमसी को देने पर सहमति जताई है। अब तक वह हर महीने केवल 3.94 करोड़ रुपये चुका रही थी। यह होटल आईएचसीएल की एक अहम संपत्ति है और वित्त वर्ष 2017 में इसका राजस्व 2.2 अरब रुपये रहा। नीलामी जीतने के बाद अब कंपनी 40 साल पुराने इस होटल को नए सिरे से संवारने के लिए निवेश कर सकेगी। होटल के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण कंपनी इसमें बड़ा निवेश करने से बच रही थी। आईएचसीएल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी पुनीत चटवाल ने इस बात पर खुशी जताई कि ताज महल होटल कंपनी का हिस्सा बना रहेगा। उन्होंने कहा, ‘हम होटल में निवेश करेंगे और इसे भारतीय आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।’

आईएचसीएल ने ताज मानसिंह को पट्टे पर लेने के लिए एनडीएमसी के साथ 1976 में करार किया था और उसके दो साल बाद 292 कमरों का यह आलीशान होटल शुरू हुआ था। 33 साल का पट्टा 2011 में खत्म हो गया। जब एनडीएमसी ने होटल की नीलामी करने का फैसला किया तो आईएचसीएल ने इसे दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी। कई बार पट्टे की अवधि बढ़ाए जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने अप्रैल में इसकी नीलामी को मंजूरी दे दी। एक हॉस्पिटैलिटी कंसल्टेंसी फर्म के एक अधिकारी ने कहा, ‘यह बेमेल होड़ थी जहां मौजूदा ऑपरेटर को तैयार और चालू होटल मिला वहीं नए बोलीकर्ता को एक ऐसी संपत्ति मिलती जिसमें उसे बहुत निवेश करना पड़ता और होटल को चलाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता। ऐसे मामलों में मौजूदा ऑपरेटर हमेशा लाभ की स्थिति में रहता है। ऐसा लगता है कि राजस्व बढ़ाने के लिए नीलामी आयोजित की गई लेकिन इसके लिए जो परिस्थितियां बनाई गईं उनसे यह बात साबित नहीं होती है।’

एनडीएमसी के लिए भी ताज मानसिंह की नीलामी का सफर आसान नहीं रहा। उसने दो बार पहले भी इसकी नीलामी की कोशिश की तो वह न्यूनतम तीन बोलीदाता नहीं ढूंढ पाई। इसके बाद उसने शर्तों में ढील देने का फैसला किया था। न्यूनतम बोलीदाताओं की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी गई और साथ ही कुछ वित्तीय शर्तों को भी शिथिल कर दिया गया।

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