बिलासपुर/महिलायें हर दृष्टिकोण से सशक्त बने। संस्कारित परिवार का निर्माण करना महिलाओं की जिम्मेदारी होती है। बेटा-बेटी और बेटी-बहू में जहां भेदभाव नहीं होता वह परिवार संस्कारवान होता है और वह घर स्वर्ग के समान है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती रमशीला साहू ने आज बिलासपुर में आयोजित पोषण त्यौहार व महिला सम्मेलन में यह बातें कही।
    

सिम्स मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमती साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थी। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सरकार के विभिन्न प्रयासों से छत्तीसगढ़ में कुपोषण का दर 37 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत हो गया है। छत्तीसगढ़ सरकार को कुपोषण के विरूद्ध बेहतर कार्य के लिये देश में सम्मानित भी किया गया है। छत्तीसगढ़ को सुपोषित राज्य बनाना चाहते हैं तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि बेटा और बेटी दोनों को सुपोषित करें। परिवार, समाज और राज्य को सुपोषित बनायेंगे, यह संकल्प लेकर जायें। देश को नई उंचाईयों पर ले जाने में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान हैं। महिलायें जागरूक और सशक्त होंगी तो भारत को विश्व में एक अलग पहचान मिलेगी। महिलाओं की क्षमता को जाने और शासन की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा से फायदा उठायें जिससे उनके घर और परिवार में सुख और समृद्धि आयेगी।

श्रीमती साहू ने कहा कि महिलाओं के कल्याण के लिये विगत 15 वर्षों में अनेक योजनायें बनीं। बेटी के जन्म के बाद अब उसके भविष्य की चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। नोनी सुरक्षा योजना में बेटी के जन्म के बाद हर वर्ष 5 हजार रूपये उसके नाम से जमा होता है तथा बेटी के 18 वर्ष होने पर 1 लाख रूपये माता पिता को मिलेंगे। इस योजना में 39 हजार से अधिक बेटियों का पंजीयन हुआ है। गरीब बेटियों के विवाह के चिन्ता सरकार कर रही है। अब तक 88 हजार से ज्यादा बेटियों के हाथ पीले किये गये हैं। महिलाओं पर कोई संकट न हो लेकिन संकट आ जाये तो उसके निराकरण के लिये सखी वन स्टॉप सेंटर हर जगह खोला गया है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर आत्मसम्मान के साथ जीवन बिताने के लिये छत्तीसगढ़ महिला कोष योजना संचालित है। महिलायें स्व-सहायता समूह के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही है। महिला जागरूकता शिविर के माध्यम से महिलाओं को योजनाओं की जानकारी दी जाती है। 4 हजार से ज्यादा शिविर लगाकर साढे़ 4 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया गया है। राज्य के विकास की जो कहानी लिखी जा रही है उसमें महिलाओं ने भी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की है। संचार क्रांति योजना से 40 लाख ग्रामीण महिलायें और 5 लाख कॉलेज छात्राओं के जीवन में परिवर्तन लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवा छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
    

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती हर्षिता पाण्डेय ने कहा कि महिलाओं के लिये जन्म से लेकर मृत्यु तक के लिये योजनायें बनाई गई हैं। कोई घर ऐसा नहीं है जहां सरकार की योजना का लाभ नहीं पहुंचा है। छत्तीसगढ़ में कुपोषण दर में कमी लाने में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सराहनीय कार्य किया है। सरकार भी महिलाओं के साथ खड़ी है। हम अबला नहीं, सबला बनकर आगे बढ़ेंगे।
    

 जिला महिला बाल विकास अधिकारी श्रीमती किरण सिंह ने बताया कि बिलासपुर जिले में कुपोषण की दर में वर्ष 2012 से वर्ष 2017 तक 14 प्रतिशत की कमी आई है। पूरे राज्य में बिलासपुर जिला दूसरे नंबर पर है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बेहतर प्रदर्शन करते हुये 6 माह में 19 हजार हितग्राहियों को जिले में लाभान्वित किया गया है। राष्ट्रीय पोषण मिशन एवं मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन अंतर्गत जिले में चल रहे गतिविधियों के बारे में बताया गया।
    

इस अवसर पर सक्षम योजना के तहत 3 महिलाओं को स्वरोजगार के लिये 1-1 लाख रूपये का चेक तथा छत्तीसगढ़ महिला कोष से 8 महिला स्व-सहायता समूहों को 50-50 हजार रूपये का चेक प्रदान किया गया। श्रेष्ठ कार्य करने वाले विभाग के परियोजना अधिकारियों, सुपरवाईजरों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं को प्रशस्ति पत्र मंत्री के हाथों प्रदान किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न स्व-सहायता समूहों ने स्टॉल लगाये थे, जिनका अवलोकन कर श्रीमती साहू ने महिलाओं की गतिविधियों की सराहना की।
    

इस अवसर पर जनपद पंचायत मस्तूरी की अध्यक्ष श्रीमती चांदनी भारद्वाज, जनपद पंचायत बिल्हा के उपाध्यक्ष  विक्रम सिंह ठाकुर, श्रीमती पूजा विधानी, श्रीमती सुधा गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिहं सहित विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मितानिन, महिला स्व-सहायता समूह के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।