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सरकार ने 19 उत्पादों पर बढ़ाया आयात शुल्क

नई दिल्ली /गैर-आवश्यक वस्तुओं के आयात को कम करने की योजना की घोषणा के करीब दो हफ्ते बाद सरकार ने 19 वस्तुओं के आयात पर शुल्क में आज इजाफा कर दिया। इस कदम का मकसद चालू खाते का घाटा कम करना है। नई दरें आज मध्य रात्रि से प्रभावी हो गई हैं। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि बीते वित्त वर्ष में इन उत्पादों का कुल आयात बिल 86,000 करोड़ रुपये रहा था, जो भारत के कुल आयात बिल का महज 2.8 फीसदी है। ऐसे में सरकार के इस कदम पर सवाल उठते हैं कि इससे चालू खाते का घाटा कितना कम होगा।
जिन वस्तुओं के आयात शुल्क में वृद्घि की गई है, उनमें सबसे ज्यादा संख्या इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की है, जिसका कच्चे तेल और सोने के बाद आयात बिल में अहम योगदान रहता है। स्पीकर, एयर कंडीशनर, घरेलू रेफ्रिजेरेटर, 10 किलो से कम क्षमता वाली वॉशिंग मशीन पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। दूसरी ओर इन उत्पादों में लगने वाले कंप्रेशर पर शुल्क मौजूदा 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी किया गया है। 2017-18 में भारत ने 21 अरब डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात किया था, जिनमें मोबाइल फोन और उसके पुर्जे मुख्य रूप से शामिल थे। 
सरकार ने साथ ही विभिन्न रूपों में हीरे और रंगीन रत्नों के आयात पर शुल्क बढ़ाया है। आभूषण और कीमती धातुओं के साथ-साथ सोने और चांदी के बर्तनों को भी इसमें शामिल किया गया है। देश में इनका 3.14 अरब डॉलर का आयात होता है। दिलचस्प बात है कि सोने के आयात पर सीमा शुल्क नहीं बढ़ाया गया है लेकिन वरिष्ठï अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में जल्दी ही फैसला हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले को कोई अन्य देश चुनौती नहीं देगा। वधावन ने मंगलवार को कहा था, ‘विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत हमें एक सीमा तक आयात शुल्क बढ़ाने का अधिकार है।’ 
विशेषज्ञों का कहना है कि आज की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में किसी भी देश को आयात शुल्क के मामले में सावधानी से फैसला लेने की जरूरत है क्योंकि अभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में संरक्षणवाद की मांग उठ रही है। वरिष्ठï व्यापार विशेषज्ञ और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी सबसे पसंदीदा देश के सिद्घांत पर लगाया गया है जिसमें कहा गया है कि सभी देशों पर समान दर से कर लगाया जाना चाहिए। आयात शुल्क में बढ़ोतरी व्यापार नियमों के दायरे में है।
बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले सेनिटरीवेयर उत्पादों और प्लास्टिक पर आयात शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। रसोईघर में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक उत्पादों के शुल्क में भी समान बढ़ोतरी की गई है। भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 12.4 करोड़ डॉलर मूल्य के इन उत्पादों का आयात किया था। एयर टर्बाइन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर भी आयात शुल्क को पांच फीसदी कर दिया गया है जबकि पहले इस पर शुल्क नहीं लगता है। हालांकि एक विमानन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इससे हवाई किराये पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारतीय एयरलाइंस जेट ईंधन का आयात बहुत कम करती हैं। 
source-B.S.
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