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सरकार ने 37 हजार में खरीदी एक गीता, बाजार में 200 रुपये है कीमत : दुष्यंत चौटाला…..

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) सांसद दुष्यंत चौटाला ने सोमवार को  हरियाणा सरकार पर धार्मिक ग्रंथ गीता की खरीद में अनिमियतता घोटाले का आरोप लगाया। यहां जारी बयान में चौटाला ने सूचना अधिकार के माध्यम से गीता ग्रंथ खरीद का खुलासा करते हुए कहा है कि गीता ग्रंथ की 10 प्रतियां 3 लाख 79 हजार 500 रुपए में खरीदी गई यानि कि एक गीता की कीमत 37 हजार रुपए से अधिक है।

 

उन्होंने इतनी मंहगी गीता पुस्तक खरीदने पर सवाल खड़े किए हैं जबकि बाजार में इससे काफी कम कीमत पर गीता की पुस्तक उपलब्ध है। उन्होंने कहा है कि प्रगति मैदान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में तो गीता प्रेस गोरखपुर वाले 40 रुपए में एक गीता उपलब्ध करवा रहे हैं जबकि ऑन लाइन पर गीता की पुस्तक 200 से 300 रुपए में उपलब्ध है और अन्य कई प्रकार की गीता की पुस्तकें काफी कम कीमत पर उपलब्ध हैं।

उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा है कि ऐसा इस खरीदी गई गीता की पुस्तक में क्या था जिसके लिए इतनी भारी कीमत अदा की गई। चौटाला ने आरोप लगाया कि हिंदुओं का धार्मिक गीता ग्रंथ कम कीमत पर बाजार में उपलब्ध है परन्तु सरकार ने आस्था के नाम पर लाखों रुपए अदा कर गीता ग्रंथ की प्रतियां खरीदीं।

जाहिर है कि गीता ग्रंथ खरीद में न केवल भारी अनियमितताएं बरती गई बल्कि जनता के खून पसीने की कमाई पानी की तरह बहाई गई। चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को इस मामले में आगे आकर इसका न केवल जवाब देना चाहिए बल्कि पूरी खरीद की जांच करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इसकी निष्पक्ष जांच नहीं करवाई तो वह गीता महोत्सव आयोजन की पूरी खरीद प्रक्रिया का मामला सीएजी के समक्ष रखेंगे।

 

चौटाला ने कहा कि गीता ग्रंथ हमारे हिंदुओं का पवित्र ग्रंथ है और हम सब के लिए यह पावन-पवित्र है परन्तु सरकार ने इतनी अधिक मूल्य से खरीदी गई गीता ग्रंथ में ऐसा खास क्या है, इसका खुलासा जनता के सामने किया जाए। चौटाला ने गीता महोत्सव के लिए की गई पूरी खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए और इसकी जांच की मांग की।

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