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कांग्रेस नेता तरु तिवारी ने बयां की लाठीचार्ज के दर्द की कहानी

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बिलासपुर। लाठी चार्ज पर कांग्रेस नेता तरुण तिवारी ने अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि एडिश्नल एसपी नीरज चंद्राकर ने कांग्रेस भवन को घेरा और कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तारी देने कहा। हमने कहा यदि गिरफ्तार करना था तो मंत्री अमर अग्रवाल के घर के पास करना था। इस तरह कांग्रेस ने गिरफ़्तारी देने से इंकार कर दिया और कांग्रेस भवन के सामने लॉबी में रघुपति राघव का गान करने लगे। एसएसपी नीरज चंद्राकर अंग्रेजी हुकूमत के जमाने के जनरल डायर बन गए और लाठी चार्ज करवाने लगे। यहां भगदड़ मच गई। ये अंदाज किसी को नहीं था कि वे कांग्रेस भवन के अंदर घुस जाएंगे। अंदर घुसकर जमकर गुंडा गर्दी की गई, खुलेआम गालीगलौच करते कर हम सब की बर्बर पिटाई की गई।
तरु तिवारी ने कहा कि पूरा दृश्य इतिहास के पन्नों में उल्लेखित जालिया वाला बाग कांड की याद दिला दिया। केवल गोली चलनी बची थी वह भी कर ही लेना था। दूसरा झीरम बिलासपुर में हो जाता। मैं भी पुलिस की इस क्रूरता का शिकार हुआ। मुझे पीठ पर, हाथ-पैर पर गंभीर चोट लगी है। लाठी चार्ज के बाद सभी को गिरफ्तार करके कोनी थाने ले जाया गया और कुछ साथी को हिस्पिटल एडमिट कराया गया। मैं पहली गाड़ी में नहीं जा पाया, पैर में तकलीफ काफी थी। घर पे फोन करके अपने पापा को बुलवाया। उस वक्त तक सभी ये बोल रहे थे कि जेल भी जाना पड़ सकता है। थोड़ी देर में मेरे पापा भी कोनी थाने आ गए। वो भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। पर वो भावुक हो गए थे। 
उन्होंने कहा, मेरे साथ अन्य 22 साथियों को भी चोट थी जो हॉस्पिटल नहीं पहुंच पाए। बहुत दबाव बनाने पर मुलाहिजा पेपर बनाया गया। इन सब के बीच हमारे प्रदेशाध्यक्ष भुपेश बघेल के पहुंचने का समाचार मिल। एडिश्नल एसपी अर्चना झा यहां पहुंची। तब उनसे कहा गया कि हम सब का मुलाहिजा करना चाहते हैं, उनके कहने पर मुलाहिजा पेपर बना। 12 बजे प्रदेशाध्यक्ष के जाने के बाद हम सब को पुलिस की गाड़ी में सिम्स ले जाया गया। रात होने के कारण एक्सरे मशीन बंद था। न मुलाहिजा हुआ न एक्सरे हो पाया। दूसरे दिन बुलाया गया। पर 19 सितंबर को सिविल लाइन थाने का घेराव था। उसको छोड़कर मुलाहिजा के लिए जाते नहीं बना। उसी स्थिति में उस दिन भी कांग्रेस भवन से सिविल लाइन थाने तक गया।
कांग्रेस नेता तरु तिवारी ने आगे बताया कि मैं चल नहीं पा रहा था। तो कुछ दूर साथी कमल गुप्ता की गाड़ी में बैठ गया। उस दिन सभी अनिश्चितता कालीन धरने पर थे, रात 10 बजे तक वहीं रुका रहा। 20 सितंबर को सुबह 10 बजे कोनी थाने गया और वहां से एक सिपाही को साथ लेकर सिम्स आया। यहां मुलाहिजा वाले डॉक्टर नहीं थे। एक्सरे पर पता चला कि मेरे दाएं पैर की ऐड़ी की हड्डी का कोना टूट गया है और गंभीर चोट लगी है। तरु तिवारी ने बताया कि यह बिलासपुर के इतिहास में सबसे काला दिन माना जाएगा जो पुलिस की तानाशाही और बर्बरता का प्रमाण है। 
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