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तीन दिन बाद भी सवाल अनसुलझा,लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया

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बिलासपुर। 18 सितंबर को कांग्रेस के विरोध के बाद पुलिस द्वारा कांग्रेस भवन में घुसकर “लाठीचार्ज’ मामले ने पूरे प्रदेश में उथल-पुथल मचा दिया है। अभी शहर में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि आईजी और एसपी के शहर में होने के बाद क्या एडिश्नल एसपी को इतनी बड़ी कार्रवाई का हक़ है। या फिर एडिश्नल एसपी नीरज चंद्राकर को किसी बड़े प्रभाव के व्यक्ति ने ऐसा करने को कहा था। कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुलिस द्वारा किसी बड़े प्रभाव के व्यक्ति द्वारा किया है। वहीं कुछ बताते हैं कि बर्बर लाठीचार्ज किसी भी बड़े अधिकारियों की अनुमति के बिना संभव नहीं है।
शहर में यह चर्चा उबाल पर है कि पुलिस अगर चाहती तो मंत्री अमर अग्रवाल के बंगले के पास विरोध कर रहे कांग्रेसियों को गिरफ्तार कर सकती थी। मगर विरोध के आधे घंटे बाद पुलिस अचानक कांग्रेस भवन कैसे पहुंची ? किसने उन्हें अमानवीय व्यवहार का निर्देश दिया। बुद्धिजीवियों का कहना है कि इस मामले में अगर कॉल डिटेल्स खंगाली जाए तो बड़े-बड़े दिग्गज चपेट में आ सकते हैं। आईजी, एसपी के होने के बावजूद अगर एडिशनल एसपी नीरज चंद्राकर द्वारा ऐसा किया गया। तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। और अगर आईजी और एसपी की जानकारी में यह घटना हुई है तो निश्चित ही गलत है।
एक ओर छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह प्रदेश में घूम-घूम कर विकास यात्रा में अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं। ऐसे में बिलासपुर के कांग्रेस भवन में पुलिस द्वारा गुंडे के समान घुसकर वहां मौजूद कार्यकर्ताओं पर बर्बर लाठी बरसाना एक बड़ी घटना है। जबकि यहां प्रदेश के नगरीय निकाय मंत्री भाजपा के दिग्गज नेता, शहर विधायक अमर अग्रवाल भी रहते हैं। शहर में तमाम तरह के चर्चों में यह बात विशेष रूप से आ रही है जिसे हमने आप सबके समक्ष रखा है।
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