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227 तालाबों को पाटकर राजधानी रायपुर में किया गया अवैध निर्माण, भाजपा का एकात्मक भवन उन्हीं में से एक

रायपुर। आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला से पता चला है कि राजधानी रायपुर में कुल 227 तालाब हुआ करते थे। जो राजधानी की सुंदरता में चार चांद लगाते थे। पर उन्हें धीरे-धीरे पाटकर मल्टीप्लेक्स, बड़े कॉम्प्लेक्स, बिल्डिंग्स में बदल दिए गए। यहां तक कि देश की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी का राजधानी रायपुर में जो कार्यालय है ‘एकात्मक परिसर’ वह भी रजबंधा तालाब को पाटकर बनाया गया है। जो वर्तमान में फरिश्ता कॉम्प्लेक्स भी कहलाता है। इस तरह धीरे-धीरे करके रायपुर की सुंदरता चौगुना करने व आम जनजीवन को जल की बहुलता देने वाले बहुमूल्य तालाबों को पाटकर आधुनिक निर्माण की नींव रखी गई। जबकि किसी भी तालाब को पुनः जीवित करने के लिए खोदा नहीं गया।
आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाया था जिसके परिणाम स्वरुप उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई। इसमें प्राप्त आरटीआई दस्तावेज़ बताते हैं कि राजधानी रायपुर में कुल 227 तालाब हुआ करते थे, जिसमें से 3 सार्वजनिक तालाबों को शासन द्वारा उद्योग विभाग को दे दिया गया है। वहीं धीरे से सूखा या दलदल बना कर गार्डन, कॉम्प्लेक्स, बिल्डिंग, कॉलोनी में तब्दील कर दिए गए इनमें कुल तालाबों की संख्या 53 है, जिनमें निजी तालाब-29, विवादग्रस्त और निस्तारी के तालाब-3, रिक्त तालाब की संख्या-23, वहीं आबंटित तालाब-116 हैं। 
कुणाल ने न्यूज़ हब इनसाइट से बातचीत के दौरान बताया कि शहर के तालाब कब्जा कर लिए गए, नहरों को सड़कों के नाम से पाट दिया गया। बोर करने से 1500 फिट में भी अब पानी नहीं है, उन्होंने बताया कि हम मोर नहीं, मरता रायपुर की ओर जा रहे हैं। जहां नेता आबाद हो रहे हैं। राजधानी रायपुर के रहने वाले सोशल एवं आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल ने बताया कि आज रायपुर में जल संकट व्यापक रूप से है। पक्ष-विपक्ष की सरकार द्वारा अपने-अपने शासन समय मे तालाबों को पाटकर उस जगह में या तो ऊंचे भवन बना दिए गए या फिर मॉल का निर्माण कर दिया गया पर एक भी तालाब को जीवित करने के लिए खोदा नहीं गया। उन्होंने बताया कि इसका विरोध करने के लिए वह एनजीटी में याचिका लगाएंगे। इससे पूर्व में भी उन्होंने इसी संदर्भ में ज्ञापन सौंपा था। लेकिन उसका कोई भी परिणाम नहीं निकला।
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