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शहर नेतृत्व ने बेवकूफों की फ़ौज जमा की है, जिन्हें व्यवहारिक व तकनीकी ज्ञान नहीं है : शैलेंद्र

बिलासपुर। अटल घड़ी स्मारक में त्रिशूल और तड़ित चालक को लगाने में गंभीर तकनीक त्रुटि की गई है। इतनी ऊंचाई पर धातु का के दो अलग-अलग विद्युत संवाहक कभी भी नहीं लगाना चाहिए। आकाश से बिजली गिरने की दशा में बिजली तड़ित चालक और त्रिशूल दोनों पर गिरेगी जिसे तड़ित चालक की बिजली तो भू-गर्भ में समा जाएगी, पर त्रिशूल पर गिरी बिजली नगर घड़ी के अस्तित्व को ही समाप्त कर देगी। इन बातों को कांग्रेस पार्षद दल के प्रवक्ता शैलेंद्र जायसवाल ने कहा है जो नेहरू चौक के छत्तीसगढ़ भवन में बने अटल घड़ी स्मारक के विषय में है।
शैलेंद्र ने आगे कहा है कि बिलासपुर नगर की दुर्गति में सबसे ज्यादा दोष शहर के नेतृत्व का है। उन्होंने आस-पास बेवकूफों की फौज जमा कर ली है, जिन्हें जरा सा भी व्यवहारिक ज्ञान और तकनीकी ज्ञान है। इन्हें नगर निगम के अधिकारी, इंजीनियर जो समझा देते हैं वह समझ जाते हैं और उसको पूरे शहर में ढिंढोरा पीटने लग जाते हैं। वह नहीं समझते कि नगर निगम के इंजीनियर उन को उल्लू बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।
नगर घड़ी के ऊपर एक तड़ित चालक और एक त्रिशूल लगाया गया है तड़ित चालक और त्रिशूल के बीच 1 फुट की दूरी है। इस इंजीनियर ने बात बढ़ने पर इन भाजपाई लोगों को समझा दिया कि यह त्रिशूल नहीं ताडितचलक है और सारे मंत्री के दरबारी इस त्रिशूल को तड़ित चालक बनाने में लग गए। शैलेंद्र ने आगे कहा है कि नगर निगम के ये वही अधिकारी हैं, जिन्होंने सीवरेज परियोजना के नाम पर पूरे शहर को खोदकर बर्बाद कर दिया है। और इस परियोजना से पल्ला झाड़ कर मलाई खाने में दूसरी परियोजनाओं में व्यस्त हो गए हैं।
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