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राफेल विमान सौदे को लेकर गोहिल ने मोदी पर साधा निशाना

बिलासपुर। राफेल लड़ाकू विमान मुद्दे पर के मोदी सरकार पर हमले तेज करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बिहार प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने आज मोदी सरकार पर इसका सौदा करने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया और कई समितियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। शक्ति सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इस सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले सरकार ने सुरक्षा पर मंत्रिमंडल की समिति को भरोसे में नहीं लिया।

उन्होंने यहां कोर्टयार्ड मैरिएट होटल में पत्रकारों से कहा, ‘‘राफेल सौदे में रक्षा खरीद प्रक्रिया को क्यों नजरअंदाज किया गया और अनुबंध वार्ता समिति तथा मूल्य वार्ता समिति को अंधेरे में क्यों रखा गया? सुरक्षा पर मंत्रिमंडल की समिति को भी भरोसे में नहीं लिया गया।’’ कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार द्वारा तय की गई हर विमान की कीमत और अब मोदी सरकार जिस कीमत पर राजी हुई है, उसमें बड़ा अंतर है।

गोहिल ने कहा  कि‘‘कांग्रेस ने हर राफेल विमान की कीमत 526 करोड़ रुपए तय की और प्रधानमंत्री के समझौते में एक विमान की कीमत 1,670 करोड़ रुपए तय की गई। अगर यह आंकड़ा सही है तो क्या मोदी जी बताएंगे कि कीमतें तीन गुनी कैसे बढ़ गई?’’

शक्ति सिंह  ने बताया कि भारतीय एयरफोर्स की ओर से मांग आई की सेना में मीडियम मल्टीपर्पज लड़ाकू विमान की जरूरत है। कांग्रेस की सरकार ने एक टेक्निकल कमेटी को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी, कमेटी ने इंटरनेशनल लेवल पर शोध करके एक टेंडर निकाला। यह टेंडर वैश्विक स्तर में निकाला गया, यह सब सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया। इसमें दो कंपनियों को पात्र पाया गया, जिसमें पहला फ्रांस की राफेल दूसरी यूरोप की फाइटर, दोनों कंपनियों के बीच आर्थिक मापन के बाद डील राफेल कंपनी को दी गई।

गोहिल ने बताया कि 12 दिसंबर 2012 को फ्रांस की कंपनी राफेल से 526 करोड़ 10 लाख रुपये में यह सौदा तय किया गया। कांग्रेस की सरकार ने कंपनी के समक्ष यह शर्त रखी कि 18 फाइटर विमान वो बनाकर देगी, जिनका 50 फ़ीसदी निर्माण भारत में होगा। इसके अलावा लड़ाकू विमान बनाने का मेथड भी कंपनी हमें देगी ताकि हमारे देश की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पर फाइटर विमान बन सके।

अपनी बात में आगे उन्होंने भाजपा की सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की सरकार आने के बाद भी भाजपा के विदेश सचिव ने कहा था कि इसी योजनानुसार राफेल का कार्य आगे बढ़ेगा जबकि ऐसा नहीं हुआ। 10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी योजना के तहत पेरिस गए यहां मोदी जी ने तय किया कि 36 राफेल हवाई फाइटर विमान देश खरीदेगा और सारे लड़ाकू विमान फ्रांस में ही बनेंगे। पीएम मोदी ने 300% ज्यादा में यानी 526 करोड़ से टेक्निकल बिट वहीं होने के बाद भी 1670 करोड रुपए में यह सौदा तय किया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मोदी जी के अनाउंसमेंट के 10 दिन पहले ही एक कंपनी बनती है और लाइसेंस लेती है।

जिसके पास हवाई जहाज बनाने का कोई भी एक्सपीरियंस नहीं है,  ऐसी कंपनी को 35 हज़ार करोड़ रुपए का ऑफसेट कांट्रेक्ट कैसे मिल गया। भारतीय सरकार की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को ना देकर अनिल अंबानी की कंपनी को मिला। यहां तंज कसते हुए गोहिल ने कहा कि मोदी जी का ट्विटर मुंह खोले यहां-वहां दौड़ता रहता है जबकि जब अपनी बारी आती है, तब यह खामोश रहता है। इसमें जवाब देने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों कतरा रहे हैं, यह बात समझ के बाहर है। उन्होंने बताया कि 60,145 करोड़ रुपये की राफेल डील ने साबित कर दिया कि ‘कल्चर ऑफ क्रोनी कैपिटलिज़्म’ यानि 3C’s मोदी सरकार का डीएनए बन गया है। ‘झूठ परोसना’ व ‘छल-कपट का चक्रव्यूह बुन’ देश को बरगलाना ही अब सबसे बड़े रक्षा सौदे में भाजपाई मूल मंत्र है।

गोहिल ने बताया कि जब कांग्रेस ने इसका विरोध किया तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बताया कि यह महंगाई के कारण हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया है कि आखिर देश की जनता को वह यह क्यों नहीं बताते कि 300% ज्यादा में क्यों इसे खरीदा गया और सरकार ने अपनी कंपनी को छोड़कर अनिल अंबानी की कंपनी को राफेल डील क्यों दिलाई। भाजपा पार्टी पर कटाक्ष करते हुए गोहिल ने कहा कि सच यह है कि भाजपा खुद यह नहीं चाहती कि देश सुरक्षित रहे। जो सेना 24 घंटे बिना किसी सुख-सुविधाओं के देश की सरहद पर तैनात रहती है। हमारी सुरक्षा में तैनात रहती है। उनके साथ यह भाजपा सरकार द्वारा किया गया सबसे बड़ा धोखा है जो अक्षम्य है। क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बात से विचलित होकर इतना झूठ बोल रहे हैं कि एक झूठ छुपाने के लिए 1000 झूठ उन्हें और बोलने पड़ रहे हैं? क्या ये विशेषाधिकार का हनन नहीं ?

भारतीय जनता पार्टी ने कहा था कि बोफोर्स में राजीव गांधी ने खूब पैसे खाए हैं, इस मामले में उन्होंने कहा था कि उन्हें 5 साल का समय दे दिया जाए तो वे राजीव गांधी का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल कर जनता के सामने रखेंगे पर भाजपा आजतक राजीव गांधी पर लगाए गए आरोप साबित नहीं कर पायी। जबकि न्यायपालिका ने यह साफ-साफ कह दिया है कि राजीव गांधी द्वारा बोफोर्स में कोई भी घोटाला नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि एक समय था, जब कारगिल युद्ध में शामिल हुए सेना के एक बड़े अधिकारी ने अंग्रेजी अखबार में एक लेख लिखा था उसमें उस अधिकारी ने कहा था कि बोफोर्स गन हमारे पास नहीं होती तो हम कारगिल का युद्ध नहीं जीत सकते। यह विजन राजीव गांधी का था। गोहिल ने आगे बताया कि राफेल डील से जुड़े सारे सबूत एआईसीसी की वेबसाइट में उपलब्ध हैं। 

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