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हाईकोर्ट में न्यायिक अकादमी के नए भवन का लोकार्पण

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के नए भवन का उद्घाटन आज किया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय परिसर में 28.17 करोड़ की लागत से निर्मित छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के इस नवीन भवन को तैयार किया गया है, जिसका उद्घाटन आज भारत के प्रधान न्यायाधिपति दीपक मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीएम रमन सिंह भी मौजूद रहे। जस्टिस दीपक ने कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी में ज्ञान, कौशल व व्यावसायिक दक्षता का होना जरूरी है। तभी एक न्यायिक अकादमी मे उसका प्रशिक्षण सफल माना जाएगा। न्याय हासिल करना हम सबका संवैधानिक अधिकार है जो बिना आधारभूत संरचनाओं के संभव नहीं है। जब हम आधारभूत संरचना के बारे में विचार करते हैं तो हम एक अच्छे भवन के बारे में सोचते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अधोसंरचना में भवन महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ-साथ मानसिक व बौद्धिक अधोसंरचना की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने राज्य न्यायिक अकादमी भवन को राज्य के साथ-साथ उच्च न्यायालय के लिये भी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने इस संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले न्यायिक अधिकारियो से अनुरोध किया कि वे इसका अधिकतम लाभ लें और न्यायिक संवेदना, ज्ञान, और व्यावसायिक दक्षता प्राप्त करें। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि जजों को यह मानकर चलना चाहिए कि हम जिस प्रशिक्षण के लिये आये हैं उसका उद्देश्य लोगों को कानून के प्रति शिक्षित करना भी है यह व्यावहारिक रूप से भी हो। कानून की नवीन स्थितियों के चलते तकनीकी रूप से दक्ष होना भी जरूरी है।

उन्हें नये कानूनों की जानकारी होनी चाहिए, उन्हें विनम्र होना जरूरी है और निर्णय लेते समय इस बात का ध्यान रखना है संवैधानिक दायरे में रहते हुए संवेदनशील रहना है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में भारत के मुख्य न्यायाधिपति दीपक मिश्रा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि वे कर्मयोगी हैं और उनका व्यक्तित्व एक कवि, लेखक, दार्शनिक व एक जज के रूप में है। प्रधान न्यायाधीश द्वारा किए गए निर्णय भविष्य को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। 

छत्तीसगढ़ राज्य में न्याय प्रशासन की विकास यात्रा उत्तरोत्तर प्रगति पर है : मुख्यमंत्री

इस दौरान मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में न्याय प्रशासन की विकास यात्रा उत्तरोत्तर प्रगति पर है। राज्य स्थापना के साथ त्वरित व पारदर्शी न्याय व्यवस्था लागू करने राज्य सरकार द्वारा हरसंभव प्रयास किया गया है। राज्य निर्माण के समय न्याय प्रशासन का बजट 16 करोड़ रूपये था जो अब 641 करोड़ रूपये हो गया है। सीएम ने बताया कि छत्तीसगढ़ एकमात्र राज्य है जहां कर्मिशियल कोर्ट की स्थापना की गई है। राज्य के न्यायिक अधिकारियों को सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप वेतनमान का लाभ देने वाला दिल्ली के बाद छत्तीसगढ़ दूसरा राज्य है। उन्होंने कहा कि छतीसगढ़ में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना गरीबों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने अपनी बात में हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय 102 न्यायिक अधिकारी राज्य को बंटवारे में मिले थे। वर्तमान में 503 पद स्वीकृत हैं और 450 न्यायिक अधिकारी अपनी सेवायें वर्तमान में प्रदान कर रहे हैं।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज और राज्य न्यायिक अकादमी के चेयरमेन जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने किया और कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन अकादमी के सदस्य और हाईकोर्ट के जज जस्टिस एम.एम.श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर न्यायिक अकादमी में स्थापित स्वामी विवेकानन्द जी के मूर्ति का अनावरण भी किया गया। कार्यक्रम में हाईकोर्ट के सभी माननीय जज, नगरीय प्रशासन उद्योग वाणिज्यकर आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल, वन एवं विधि विधायी मंत्री महेश गागड़ा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, मुख्य सचिव छ0ग0 शासन अजय सिंह, प्रमुख सचिव विधि विभाग, बिलासपुर के संभागायुक्त टी.सी.महावर, आईजी दीपांशु काबरा, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमी के डायरेक्टर के.एल.चरयानी, महाअधिवक्ता जुगल किशोर गिल्डा, स्टेट बार कौंसिल के सदस्य सहित न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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