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ई-रिक्शा से संवर रही जिंदगी, स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे कदम

बिलासपुर। अथक परिश्रम सफलता का सूत्र होता है, अगर संकल्प सच्चा हो तो हर मुश्किल अपने आप ही दूर हो जाती है। सरकार द्वारा स्वरोजगार ऋण व मुख्यमंत्री ई-रिक्शा वितरण ने भी कइयों को स्वरोजगार दिलाया है। जिनसे एक ओर बेरोजगारी में तेजी से गिरावट आ रही है, वहीं दूसरी ओर स्वरोजगार से उनके जीवन का एक नए अध्याय की सुखद शुरुआत हुई है। कुदरत के दिए चोट से आहत बचपन से दिव्यांग तेज प्रकाश तथा लक्ष्मण की मुरझाई सी जिंदगी में शासन की ई-रिक्शा योजना से बहार आ गई है। 
यहां बदलते जिंदगी की पहली कहानी तेज प्रकाश भारद्वाज की है, जिसने अपना पूरा जीवन संघर्ष के पत्थरों को तोड़ते हुए अभाव में गुजारा तात्पर्य समाज से अलग रहकर, भगत सिंह आजाद नगर तिफरा में रहने वाले बचपन से दिव्यांग तेज प्रकाश पहले फोटो फ्रेमिंग के कार्य के कार्य कर बमुश्किल से दो सौ से दो सौ पचास रुपये प्रतिदिन कमाता था। फिर एक दिन किस्मत ने तेज प्रकाश का दरवाजा खटखटाया और उसे राज्य श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री ई-रिक्शा सहायता योजना की जानकारी मिली। तेज प्रकाश ने अपना पंजीयन असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल में करा कर ई रिक्शा के लिए आवेदन दिया। ई रिक्शा मिलने के बाद तेज प्रकाश प्रतिदिन उससे पांच सौ से छह सौ रूपये कमाकर अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण अच्छे से कर रहा है। मासिक किस्त भी मात्र बाईस सौ रूपये होने की वजह से उसका भुगतान भी आसानी से हो जाता है।
इसमें दूसरी प्रेरणा देने वाली कहानी शहर से जुड़े बिलासा ताल के पीछे रहने वाले लक्ष्मण की है, गरीबी रेखा में जीवन यापन करने वाले बचपन से दिव्यांग लक्ष्मण कुछ-कुछ काम कर के बमुश्किल से दो सौ से दो सौ पचास रूपये प्रतिदिन कमाता था। बाद में बैंक से ऋण लेकर ई रिक्शा लिया, जिसमें श्रम विभाग के ई रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पचास हजार रूपये की सब्सिडी का लाभ मिला। अब लक्ष्मण ई-रिक्शा से प्रतिदिन सात सौ से आठ सौ रूपये कमाकर अपने परिवार का भरण पोषण अच्छे से कर रहा है।  बेसहारा से अपने परिवार का सहारा बनने के बाद लक्ष्मण छत्तीसगढ़ सरकार का आभार प्रकट करते हुए कहते हैं कि श्रम विभाग ने मेरी जिंदगी बदल दी। 
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