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विधानसभा हारे प्रत्याशियों के पास कांग्रेस के जीत की कुंजी

बिलासपुर(शशांक दुबे )। प्रदेश कांग्रेस में विधानसभा चुनाव में टिकट दावेदारों से पार्टी ने आवेदन मांगे, 90 सीट पर 1000 से ज्यादा आवेदन आए हैं और अब छानबीन समिति की बैठकें शुरू हो रही है। आवेदनों के बाद यह बड़ा प्रश्न उठा है कि जिन स्थान पर वर्ष 2013 के चुनाव में पार्टी हारी थी और इस हारे हुए प्रत्याशी ने 2018 के लिए आवेदन नहीं किया तो उसी स्थान पर नये प्रत्याशी को टिकट देने के पूर्व क्या समिति पिछले हारे हुए प्रत्याशी से राय मशवरा करेगी, कुछ नीतिकारों का मत तो यह भी है कि पुराने हारे हुए प्रत्याशी से उन भीतरघाती का नाम छानबीन समिति को मांगना चाहिए, जिनके कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

जिले में तो इस बारे में जमकर चर्चा है। पार्टी दो स्थान पर विशेष रणनीति बना रही है, पहला नाम बिलासपुर का है, क्या यहां कांग्रेस लगातार हार रही है, वर्ष 2013 में पार्टी की प्रत्याशी वाणी राव थी यदि वे पार्टी के बाहर होती तो बात अलग थी पर वह अब कांग्रेस में हैं। 2013 में विधानसभा चुनाव लड़ने के पहले उन्होंने शहर में मेयर चुनाव में भाजपा को हराया था पर 2013 में 5 हजार से ज्यादा मतों से हारी। तब पार्टी ने हारे हुए प्रत्याशी से हार के कारणों की रिपोर्ट मांगी थी। सूत्र बताते हैं कि बिलासपुर प्रत्याशी ने हार के कारण और भितरघातियों के नाम उल्लेख के साथ प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट दी थी, पर हारे हुए प्रत्याशी की रिपोर्ट पर पार्टी ने भीतरघातियों के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की। उसके बाद शहर में मेयर चुनाव हुआ और महापौर चुनाव में रामशरण  यादव पार्टी के प्रत्याशी थे, वे तो 35 हजार वोट से हारे। उन्होंने भी उनके कांग्रेसजन के नाम बताये जिन्होंने पार्टी का नुकसान किया था।

इस बार बिलासपुर में लगभग 50 नेताओं ने चुनाव टिकट लेने के लिए आवेदन किया है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी जानते हैं कि कई आवेदक पूर्व में पार्टी के भितरघाती थे पर छानबीन समिति को यह तथ्य नहीं पता। अतः यह पार्टी हित में होगा कि बिलासपुर में प्रत्याशी तय करने के पूर्व चुनाव हार चुके प्रत्याशी से उसकी राय ली जाये।

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