स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने सीएमएचओ को दिया ज्ञापन……

बिलासपुर/छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ द्वारा बिलासपुर जिले के समस्त विकासखंडो मे जो अवव्यस्था, भ्रष्टाचार और अधिकारियों के लापरवाही पूर्ण रवैया  को लेकर मुख्य चिक्तिसा अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी को ज्ञापन दिया गया। संघ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मस्तूरी, कोटा नसबंदी कैम्प में भारत शासन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अक्टूबर 2006 में जारी quality assurance manual for sterilization sarvis  का पालन नही करने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की जानी चाहिए। किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर छोटे कर्मचारियों पर मात्र कार्यवही क्यों कि जाती है,बाकी जिम्मेदार अधिकारियों को क्यो बचाया जाता है। छोटे कर्मचारी को ही आड़े हाथों क्यो लिया जाता है।
जिम्मेदारी का बोझ छोटे कर्मचारी पर
कर्मचारी को इस बात के लिए भी बाध्य किया जाता है कि वे मुख्यालय मे रहकर ही कार्य करे,लेकिन यही आदेश अधिकारियों से कोसो दूर नज़र आती है।मेडिकल ऑफिसर सेक्टर प्रभारी कभी भी दौरा करते हुए नही दिखते है,लेकिन कर्मचारियों पर नियमित दौरा को लेकर भी तंज कसा रहता है। इसके साथ ही वेटनकटौति, वेतनवृद्धि पर रोक जैसे भी कई यातनाये कर्मचारियों पर लगातार की जाती है। कर्मचारियों के संबंध मे शिकायत मिलने मात्र से कार्यवाही के आदेश आ जाते है,पीड़ित कर्मचारी को अपनी बात रखने का मौका भी नही दिया जाता है,वही दोषी अफसर को दोषमुक्त करने के उद्देश्य से जॉच कमिटि का गठन कर दिया जाता है,जिसका फैसला योजनावध तरीके से अफसर के तरफ होता है।
वित्तीय घोटाला आम बात
BMO , BPM द्वारा वित्तीय घोटाला करना आम बात है,इसकी जानकारी जिला मुख्यालय को होने के बावजूद इसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है,कुछ समय पहले ही तखतपुर ब्लॉक के मितानिनों ने डॉक्टर के संबंध मे शिकायत दर्ज करवाई गई थी कि डॉक्टर द्वारा उन्हें बिना किसी कारण के गाली गलोच किया जाता है,संबंधित डॉक्टर के उपर दोष साबित होने के बाद भी आज की डेट तक किसी तरह की कार्यवाही नही की गई है।
भारत सरकार की गाइड लाइन को ठेंगा
5 अगस्त 2017 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी में हुए नसबंदी कैम्प में भारत सरकार द्वारा बनाये गए गाइड लाइन को ताक पर रखकर काम किया गया,जिस कारण अप्रिय घटना हुए। डॉक्टर को बचाने हेतु तुरंत ही सहयोग कर रहे 3 कर्मचारियों को निलिबित कर दिया गया,आज की तारीख मे भी निलिबित हुए कर्मचारियों की आगे की कोई कारवाही नही हुए,इसके साथ से गुजारा भत्ता और वेतन का पचहत्तर प्रतिशत भी उन्हें नही दिया जा रहा है। महिला सर्जन को तुरंत की दोष मुक्त कर दिया गया। ऐसा नही है कि ऐसी घटना एक बार हुई हो,इसके पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है। स्वास्थ्य केंद्र कोटा में हुए घटना में शामिल सर्जन पर पहले ही लापरवाही के आरोप लग चुके है,इसके बावजूद उनके द्वारा अपनी सेवाएं कैम्प मे दी गई।मेडिकल कैम्प मे कभी भी कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नही रहता है।ऐसे स्थिति मे अगर कोई घटना घट जाती है तो उसकी पूरी जवाबदारी छोटे कर्मचारियों पर डालकर नोडल ऑफिसर, दोषी सर्जन संबंधित अधिकारी को दोषमुक्त कर दिया जाता है। मैदानी कर्मचारी कब तक इस तरह से मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित होते रहेंगे। 15 दिनों के भीतर अगर इस दिशा मे कोई कार्यवाही नही की गई तो संघ द्वारा आन्दोलन किये जाने की बात कही जा रही है।
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