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जुलाई मॉब लिंचिंग से जुड़े सर्च के मामलों में सबसे आगे : प्रकाश पुंज……

रायपुर। मॉब लीचिंग क्या है, पहले आप इससे अवगत हो साधारण शब्दो में मॉब लीचिंग को भीड़ की हिंसा कहा जाता है, अगर परिभाषित करें तो ‘ न्याय व्यवस्था के कानून से ऊपर उठकर जब लोगों की भीड़ ही न्याय करने पर उतारू हो जाती है वही मॉब लीचिंग है, पर यहां न्याय मृत्यु से होता है। समझने के लिए भीड़ जब बौखलाकर किसी की जान ले लेती है यही घटना मॉब लीचिंग है।

इस संदर्भ में प्रकाश पुंज कहते हैं कि मॉब लिंचिंग भारत में एक ऐसा टर्म हो गया है जो आए दिन न्यूज चैनलों और अखबारों में दिख रहा है। इस शब्द ‘मॉब लिंचिंग’ को लेकर भारत में गूगल सर्च ट्रेंड एक नई कहानी बयां कर रहा है। कब लोगों ने इस शब्द को लेकर सर्च शुरू किया और कब इसे लेकर सबसे ज्यादा सर्च किया गया और किन-किन शहरों में इसे लेकर सबसे ज्यादा सर्च हुए ये सभी आंकड़े गूगल के पास हैं। इन आंकड़ों से ये साफ होता है कि जुलाई 2018 मॉब लिंचिंग से जुड़े सर्च के मामले में सबसे आगे है। यानी इस महीने मॉब लिंचिंग को लेकर गूगल पर अबतक सबसे ज्यादा सर्च किए गए।

प्रकाश पुंज आगे कहते हैं कि साल 2015 से शुरु हुई लिंचिंग को लेकर सर्च गूगल के सर्च ट्रेंड के मुताबिक हालिया सालों में मार्च 2015 में सबसे पहले लिंचिंग को लेकर सर्च शुरू हुई। ये सर्च इस लिए शुरू हुआ क्योंकि मार्च 2015 में नागालैंड के दीमापुर से मॉब लिंचिंग की एक घटना सामने आई। इस घटना में 6 से 7 हजार की भीड़ ने एक रेप के आरोपी को जेल से बाहर निकाल कर इतना पीटा की उसकी मौत हो गई। हालांकि, साल 2011 में भी लिंचिंग को लेकर गूगल सर्च हुआ, लेकिन उसकी इंटेनसिटी बहुत ही कम थी।

इसके बाद ‘मॉब लिंचिंग’ को लेकर सर्च सितंबर 2015 में किया गया, ये वो वक्त था जब ज्यादातर भारतीयों ने पहली बार इस टर्म को सुना। नोएडा के करीब दादरी में अखलाक नाम के एक शख्स को भीड़ ने पीटकर मौत के घाट उतार दिया। भीड़ ने ये हैवानियत इस शक के बिनाह पर दिखाई कि अखलाक का घर गोमांग है, उत्तर भारत में ये पहली ऐसी लिंचिंग की घटना थी जिसने देश ही नहीं दुनिया में सनसनी फैलाई।

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