सृष्टि इंफ्राबिल्ड की ‘सृष्टि-समृद्धि’ का काला अध्याय….

सवाल.1 कहीं आपकी जमीन पर भी कोई बिल्डर जबरन पैठ जमाए तो नहीं ?
सवाल. 2 कहीं आपका सृष्टि इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बन रहे आवासीय कॉलोनी  ‘सृष्टि-समृद्धि’ में इन्वेस्टमेंट तो नहीं ?
“अगर दोनों में से एक भी सवाल का जवाब हां है, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यहां आपकी उदासीनता आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है, पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट”
बिलासपुर। बिलासपुर रायपुर मुख्य मार्ग में रामा वेली ग्रीन सिटी के थोड़ा आगे चिरचिदा पहुंच मार्ग है, जो एलसीआईटी कॉलेज को जाता है। पीडब्ल्यूडी द्वारा यह सड़क आज से तक़रीबन 30-32 वर्ष पूर्व राहत के लिए बनाई गई थी। इसे स्थानीय किसानों के सहयोग एवम् सहमति से निर्मित किया गया। इस सड़क की लंबाई 6 किलोमीटर एवं चौड़ाई 10 फिट की है, इसे सन् 2012-13 में डामरीकृत किया गया। राहत कार्य में बनी सड़क का कोई मुआवजा नहीं दिया जाता, अतः भूमि किसानों की ही है। पीडब्ल्यूडी के पास इस भूमि से सम्बंधित कोई दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है। 
                 हास्यास्पद बात यह है कि इस चिरचिदा रोड का बोदरी पटवारी के नक्शे में कोई अलामात नहीं है ना किसी राजस्व   अभिलेख यह सड़क दर्ज है, अर्थात् राजस्व नक्शे एवं अभिलेख में यह सड़क नहीं दर्शायी गई है। बावजूद इसके बिल्डर को लाभ पहुंचाने की नियत से तत्कालीन तहसीलदार युगल किशोर उर्वशा ने बिल्डर को दिए गए दिनांक 17.11.2014 के सीमांकन प्रतिवेदन में इस रोड को 40 फुट का दर्शाया है। जिसकी वजह से बिल्डर को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से विकास अनुज्ञा प्राप्त हो गई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि शासन के भू-राजस्व नियमानुसार पगडंडी का डायवर्सन नहीं किया जा सकता। किंतु बिल्डर की भूमि में व्यवस्थित पगडंडी का डायवर्सन कर दिया।
जनवरी 2015 में इस चिरचिदा पहुंच मार्ग में मोहित नरसरिया, मनीष जैन द्वारा ‘सृष्टि समृद्धि’ नाम से 10 एकड़ 38 डिसमिल भूमि में निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। इस निर्माणाधीन कॉलोनी में पड़ोसी कृषक की भूमि का टुकड़ा जो राहत सड़क निर्माण के पश्चात मोहित नरसरिया की भूमि के सामने आ गया अर्थात् सड़क एवं मोहित नरसरिया की भूमि के मध्य पड़ोसी कृषक अशोक तिवारी की भूमि स्थित है। जो राजस्व रिकॉर्ड में अशोक तिवारी की माता शकुंतला देवी के नाम से दर्ज है। कॉलोनी वालों ने अशोक तिवारी की भूमि को अपनी भूमि बताते हुए रोड एवं अन्य निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। जिस पर अशोक तिवारी द्वारा आपत्ति की गई। अशोक तिवारी द्वारा कॉलोनी निर्माण से संबंधित दस्तावेज सूचना के अधिकार के तहत् नगर पंचायत बोदरी एवं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से प्राप्त किया गया। 
सूचना के अधिकार के तहत् वापिस प्राप्त दस्तावेजों में संलग्न तहसीलदार बिल्हा द्वारा दिनांक 17.11.2014 को प्रदत्त सीमांकन प्रतिवेदन जो कॉलोनी विकास अनुज्ञा प्राप्त करने हेतु दिया गया था, प्राप्त हुआ। अशोक तिवारी द्वारा इस सीमांकन के विरुद्ध छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 50(1) के तहत् पुनरीक्षण राजस्व मंडल में पेश किया गया। इस पर छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल द्वारा दिनांक 18.6.2015 को उक्त 17.11.2014 के सीमांकन को निरस्त कर दिया गया और नए सिरे से सीमांकन करने का आदेश जारी किया।
                    तहसीलदार बिल्हा द्वारा जब पुनः सीमांकन प्रतिवेदन राजस्व मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो अध्यक्ष राजस्व मंडल द्वारा उक्त सीमांकन को विधिसम्मत नहीं पाए जाने के कारण पुनः निरस्त कर दिया गया। तत्पश्चात अध्यक्ष राजस्व मंडल द्वारा तहसीलदार बिल्हा को दिशा निर्देश जारी करते हुए पुनः सीमांकन निर्देश जारी करते हुए, पुनः सीमांकन भू-राजस्व संहिता की धारा 121 एवं 124 का पालन करते हुए करने का आदेश दिया। इसी बीच तत्कालीन अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल डी एस मिश्रा सेवानिवृत्त हो गए।
                         वर्तमान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल के.डीपी राव द्वारा दिनांक 01.07.2017 को अशोक तिवारी द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त प्रकरण को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि, तहसीलदार के आदेश के विरुद्ध सीधे राजस्व मंडल में पुनरीक्षण पेश नहीं किया जा सकता। यहां यह उल्लेखनीय है कि सन् 1989 में राजस्व मण्डल के पूर्ण पीठ का निर्णय था कि भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा (50) 1 में राजस्व मंडल के समक्ष सीधा पुनरीक्षण पेश किया जा सकता है, यदि आक्षेपित पुनरीक्षण योग्य हो तो मंडल ग्रहण करने से इनकार नहीं कर सकता ना ही खारिज अथवा निचले न्यायालय में पेश करने के लिए भी वापस नहीं कर सकता। मंडल द्वारा इसकी सुनवाई निश्चित होनी चाहिए, इस फैसले की अनदेखी एकलपीठ ने आवेदक के आवेदन को अवैध करार देते हुए कर दिया। 
इसके पश्चात अशोक तिवारी द्वारा अध्यक्ष राजस्व मंडल के दिनांक 01.07.2017 के आदेश के विरुद्ध, युवा अधिवक्ता अभिजीत मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका मई 2018 में लगाई गई। इसके बाद उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20.06.2018 को दिए अपने फैसले में अध्यक्ष राजस्व मंडल के दिनांक 01.07.2017 के आदेश को निरस्त करते हुए प्रकरण पुनः राजस्व मंडल को इस आदेश के साथ वापस भेज दिया गया कि, 45 दिनों में यह सुनिश्चित किया जाए कि सीमांकन विधिसम्मत हो तथा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 121 से 124 का पूर्ण पालन हो, उक्त कार्यवाही तक निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए। इसी तारतम्य में नगर पंचायत बोदरी द्वारा दिनांक 05.07. 2018 को ‘सृष्टि-समृद्धि’ कॉलोनी के बिल्डर मोहित नरसरिया, मनीष जैन को जारी कॉलोनी विकास अनुज्ञा को स्थगित कर निर्माण कार्य रोकने का आदेश जारी किया। बावजूद इसके बिल्डर द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की नाफ़रमानी कर धड़ल्ले से कार्य जारी रखा गया है।
बिल्डर की मनमानी का खामियाजा भुगतेंगे कॉलोनीवासी
बिल्डर मोहित नरसरिया, मनीष जैन आवासीय कॉलोनी ‘सृष्टि-समृद्धि’ का निर्माण करा रहे हैं। कॉलोनी तक जाने का सीधा रास्ता बिना अनुमति के भू-स्वामी अशोक कुमार तिवारी की जमीन से निकाला गया है। निजी जमीन पर सड़क अवैध रूप से ‘सृष्टि इंफ्राबिल्ड’ द्वारा बनवाया गया है। इसके अलावा कॉलोनी तक आने-जाने का कोई रास्ता नहीं है। अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर भू-स्वामी अपने जमीन में कोई निर्माण करना चाहता है तो कॉलोनी में रहने वाले आवागमन कहां से करेंगे? कॉलोनी में प्रवेश करने कौन सा मार्ग बचेगा। इस तरह साफ है कि आम जनता को धोखा देकर बिल्डर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड मुनाफा कमाने वहां पर अपने आवास बेच रही है।
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