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चिल्हाटी :सरकारी स्कूल में मूलभूत सुविधा का अभाव …

बिलासपुर। जहां एक ओर शिक्षा विभाग शिक्षा गुणवत्ता वर्ष मना रहा,वहीं  हर मंगलवार को जिला कलेक्टर टीएल बैठक लेते हैं जहां जिले के अधिकारी अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करते हैं  ऐसे में सवाल उठना लाजमी है इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को किताबें अब तक क्यों उपलब्ध नहीं  कराई जा सकी जबकि शिक्षा सत्र समाप्ति की ओर है।
       
जी हां हम बात कर रहे जिला कार्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर स्थापित सरकारी प्राथमिक शाला चिल्हाटी   की। कक्षा पहिली और चौथी के बच्चों को नही मिली किताब……प्राथमिक शाला चिल्हाटी में कुल 166 बच्चे दर्ज है यहां भी शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आते बच्चे ही अपने स्कूल के दरवाजे पर लगे तालों को खोलते हैं । यहां पहली कक्षा के बच्चों को अब तक सरकारी योजनाओं के तहत निःशुल्क  मिलने वाली किताबें नहीं मिली है वहीं  कक्षा चौथी के बच्चों को भी समेकित पाठ्य पुस्तक का भाग 2 नहीं  मिली है ऐसे में बच्चे बगैर पुस्तक कैसे ज्ञान प्राप्त कर रहे होंगे ये आप और हम अच्छी तरह से समझ सकते हैं । ऐसे में कलेक्टर की समीक्षा बैठक में जो रिपोर्ट अधिकारियों द्वारा पेश की जाती है उसकी हकीकत को नकारा नही जा सकता। शिक्षकों  ने शीघ्र बच्चों को पुस्तक उपलब्ध कराए जाने की मांग की है।
 स्कूल में आहता नहीं ,खतरे में बच्चों की जान
चिल्हाटी प्राथमिक शाला में बाउंड्रीवाल नहीं होने और शाला भवन जर्जर होने के साथ साथ नदी के किनारे स्थित होने की वजह से आये दिन बच्चो की जान को खतरा बना होता है शिक्षक भी इस बात से इंकार नहीं  करते किन्तु अधिकारी को इन सब से कोई लेना देना नही वो तो सिर्फ नौकरी कर रहे हैं  वही काफी है। अब एक बार फिर सवाल उठता है कि इन मासूम बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है वो कोई ठोस कदम क्यो नही उठाते?
मध्यान भोजन की थाली भी नहीं  है स्कूल में…..
 बड़ी हैरानी की बात है कि सरकार ने मध्यान भोजन योजना के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ो रूपये खर्च कर रही है मध्यान भोजन पकाने के बर्तन से लेकर खाने की सामग्री,रसोइयों का मेहनताना,रसोई कक्ष निर्माण और न जाने क्या क्या बावजूद इसके यहां पढ़ने वाले बच्चे अपने अपने घरों से थाली लेकर आते हैं  ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिरकार शासन द्वारा मध्यान भोजन के लिए जारी राशि इन मासूम तक क्यों नहीं  पहुच पा रही,ये जांच का विषय होना चाहिये।
बहरहाल शिक्षा सचिव इस मामले की गंभीरता से लेते हुए जांच कराए तो शासन की योजनाओं पर पलीता लगा रहे अधिकारियों का भंडाफोड़ होने की प्रबल संभावना है वैसे भी शिक्षा विभाग को लोग ऐसे ही काजल की कोठरी नहीं  कहते।
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