जोगी मुक्त का कांग्रेसी जुमला!…….

बिलासपुर। देश में मोदी राज के साथ ही कांग्रेस मुक्त भारत का जुमला तेज हो गया था। ये जुमला ऐसा हो गया था कि चाहे निकाय चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, सभी में ये जुमला खूब उछला। जुमले पूरी तरह तो कारगर नहीं हुआ, पर काम अवश्य करते रहा। देश भर में उछाले गए भाजपा के इसी जुमले से बिलासपुर के कांग्रेसी बड़े प्रेरित हुए। जनता कांग्रेस (जोगी) के प्रमुख अजीत जोगी की राजनीतिक नींव कांग्रेस ही रही है। इसी पार्टी में रहते हुए वे लोकसभा तक पहुंचे। छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। पर, अब उनके अलग होने के बाद पार्टी उनसे जुड़ी स्मृतियों को हटाने का काम कर रही है। पार्टी और पार्टी के लोगों के मन से जोगी को मिटा पाएं या न मिटा पाएं, पर कांग्रेस कार्यालय से जोगी से जुड़ी स्मृतियों को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। 
दरअसल कांग्रेस भवन के जीणोद्धार के दौरान साल-2012 में बिलासपुर के कांग्रेस भवन का लोकार्पण किया गया था। लोकार्पण जब हुआ तब नंदकुमार पटेल पीसीसी प्रमुख थे। लोकार्पण जोगी के हाथों हुआ था। इसलिए लोकार्पण के लिए लगाए गए पत्थर में जोगी का नाम था। साल भर पहले जोगी कांग्रेस को ‘नमस्तेÓ बोल चुके हैं। ऐसे में अब उनके नाम का लगा पत्थर रायपुर में बैठे कांग्रेसियों को भी चुभ रहा है। इसी बीच बिलासपुर निगम ने कांग्रेस भवन के बाहर नाली निर्माण शुरु किया। लोकार्पण पत्थर नाली निर्माण की परिधि से बाहर था। पर ऐसा अवसर कांग्रेसी कहां छोडऩे वाले थे! निगम अफसरों पर दबाव डलवाकर पत्थर के पास से ही नाली बनवाया गया। अब जोगी विरोधी कांग्रेसी ये सोचकर प्रसन्न हो रहे हैं कि उन्होंने पार्टी कार्यालय के बाहर से जोगी के नाम का लिखा पत्थर हटवा दिया। अतिउत्साही कुछ कांग्रेसी तो ये भी कह रहे हैं कि अब जोगीमुक्त कांग्रेस चाहिए। स्थितियों को समझने वाले कुछ कांग्रेसी इन अतिउत्साहियों को समझा रहे हैं कि कम से कम दिसंबर-2018 तक तो रुक जाओ! चुनाव परिणाम के बाद न जाने कैसा गणित बनें? उसके बाद जैसा चाहे, वैसा जुमला उछाल लेना। ठीक यही चिंता निगम के उन अफसरों को भी हो रही है जिन्होंने जोगी नाम अंकित वाले शिलालेख को हटाने का काम किया है। ऐसे अफसर अब इसका ठीकरा स्थानीय कांग्रेसियों पर फोड़ रहे हैं। 
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नेहरु की मूर्ति पर शैलेश का कटाक्ष 
लगता है कि बिलासपुर में नाम मिटाओ अभियान चल रहा है। जहां कांग्रेसी जोगी के शिलालेख वाला पत्थर हटवाकर प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं वही निगम की ओर से शहर के नेहरु चौक का नाम बदलकर घड़ी चौक किया जा रहा है। इसके विरोध में कांग्रेसी नेता शैलेश पांडे भी आ गए हैं। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा है कि स्थानीय विधायक और मंत्री अमर अग्रवाल ने अपने चार कार्यकाल में काम तो कुछ नहीं किया। अब भावनात्मक मुद्दे उठाकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेहरु केवल कांग्रेस के ही नहीं, बल्कि देश की धरोहर हैं। उन्हीं की बनाई नीतियों पर चलकर देश आज इस स्थान पर पहुंचा है। ऐसे में जब स्थानीय विधायककी अपनी कोई उपलब्धियां नहीं है, तो वो देश के गौरव के साथ छेडख़ानी करके अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रहे हैं। शैलेश ने अमर को नसीहत देते हुए कहा कि अर्थहीन विषयों पर काम करने से उचित यही है कि अमर बचे एक साल के कार्यकाल में बिलासपुर में लिए कुछ करने की सोचे।
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