शिक्षाकर्मी अनुकंपा नियुक्ति पर बोले संघ के नेता……

बिलासपुर। शिक्षाकर्मियों की अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया व उसके नियमों का शिक्षाकर्मी संघ के नेताओं ने विरोध किया है, उन्होंने कहा कि शासन द्वारा शिक्षाकर्मियों की अनुकंपा नियुक्ति के लिए ऐसे नियम बनाये है जिनका उपयोग की नहीं किया जा सकता, उन्होंने कहा कि इन नियमों की पूर्ति नहीं हो सकती इसलिए शासन को इस मसले को गम्भीरता से लेकर इसमे संशोधन किया जाना चाहिए।

नवीन शिक्षाकर्मी संघ के नेता विकास सिंह राजपूत और अमित नामदेव ने इस मामले पर अपनी बात रखी है, उन्होंने कहा है किशासन ने शिक्षाकर्मियों को अनुकंपा नियुक्ति तो दे दी पर इसका कोई अस्तित्व नहीं। स्थिति ऐसी है की शिक्षाकर्मियों के परिजनों को आवेदन लेकर मजबूरन पंचायत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी उनसे सीधे लहजे से बात करना पसंद नहीं करते, परिजनों को शासन के नियमों की समझाइश देकर लौटा दिया जाता है, नियमों को कुछ इस तरह के सांचे में ढाला गया है कि जिन्हें चाह कर भी पूरा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने बताया कि यदि किसी शिक्षाकर्मी की मृत्यु हो जाती है तो उनके परिजनों को शिक्षाकर्मी वर्ग 3 पंचायत सहायक शिक्षक से मिलना चाहिए, उन्होंने बताया कि शासन द्वारा यह प्रावधान रखा गया है की इस प्रक्रिया के लिए दावेदार को डीएड और टीईटी होना जरूरी कर दिया गया है, उन्होंने इसपर शासन से सवाल किया है कि क्या कोई भी शिक्षाकर्मी मरने से अपने बच्चों को डीएड और टीईटी के लिए तैयार करेगा..?
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षाकर्मी की मौत के बाद शासन द्वारा तीन साल के भीतर डिग्री मांगी जाती है, सरकार ने नियम बनाये हैं कि यदि तीन साल के भीतर शर्तों को पूरा नही किया जाता तो आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।

दोनों नेताओं ने कहा कि बालोद में शिक्षाकर्मी हीरामन दास बघेल के निधन के बाद पत्नी सीमा बघेल अनुकंपा नियुक्ति के लिए दर दर भटक रही है। जिला पंचायत सीईओ बालोद ने 3 साल के अन्दर अहर्ता पूरा करने का आदेश दिया है। सोचने वाली बात है कि यदि उनके पास सब कुछ होता तो वह शिक्षाकर्मी की नौकरी पहले से ही करता होता।

दोनो नेताओं ने आगे अपनी बात में कहा कि किसी भी सूरत में डीएड 4 साल से पहले उत्तीर्ण करना नामुमकिन है, राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा समय पर नही होती, उन्होंने बताया कि सुंदर लाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में प्रवेश के पहले 2 वर्ष का अध्यापन अनुभव मांगा जाता है, फिर डीएड कोर्स में प्रवेश दिया जाता है, उन्होंने बताया कि मृत शिक्षाकर्मी के परिजनों को रेगुलर कॉलेज जाना और खर्च उठाना बहुत ही मुश्किल होता है, घर के मुखिया की मृत्यु के बाद घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही रह जाती। निजी शिक्षा महाविद्यालयों की मोटी फीस पटाना शिक्षाकर्मी परिवार के बस की बात नहीं है।

नवीन शिक्षाकर्मी संघ के नेता विकास सिंह राजपूत और अमित नामदेव ने इस नियम को बदलने की बात कही है, उन्होंने कहा है कि शिक्षाकर्मी के मृत्यु के बाद परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटकना पड़ता है इसलिए शासन को बनाये नियमों में संशोधन की आवश्यकता है। ऐसा न होने पर उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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