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बिलासपुर: अधिवक्ता प्रकाश सिंह की शिकायत पर एडिशनल कलेक्टर कुरुवंशी ने जाँच के बाद दुष्यंत कोशले और कौशल यादव को पाया था दोषी

बिलासपुर: पटवारी कौशल यादव द्वारा ग्राम मोपका के नामांतरण पंजी में अज्ञात व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर कर नामांतरण कराने व डायवर्सन शाखा से मिली भगत से शासन को लाखों रूपये के राजस्व का नुकसान पहुँचाने के संबंध में प्रमाण के साथ लिखित शिकायत अधिवक्ता प्रकाश सिंह के द्वारा कलेक्टर से की गई थी. इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर सौरभ कुमार ने जाँच का जिम्मा तत्कालीन एसडीएम तुलाराम भारद्वाज को दिया था. 

इस पर तथ्यात्मक जाँच प्रतिवेदन के लिए तत्कालीन एसडीएम तुलाराम भारद्वाज ने तहसीलदार को दल गठन करने को कहा.   तहसीलदार के  तथ्यात्मक जाँच प्रतिवेदन में आया कि ग्राम मोपका, प.ह.न. 29 के नामातरंण पंजी कमांक 834, 835, 836 में नामातंरण क्रमांक 834 में खसरा नंबर 992/9 में से रकबा 1.10 एकड़ भूमि को क्रेता किशन | यादव पिता डी.पी. यादव, सुरेश सिंह पिता चन्द्रपाल सिंह को विक्रेता विमलादेवी आजमानी पति हरवंश लाल आजमानी से विक्रय पत्र क्रमांक 1612 6. अगस्त .2020 को कय किया है, जिसको हल्का पटवारी कौशल यादव  द्वारा नामातरंण पंजी में  16. सितंबर 2020 को दर्ज किया गया है. नामातंरण क्रमांक 835 में खसरा नंबर 992/9 में से रकबा 0.56 एकड़ भूमि को केता श्रीमती अन्नू मसीह पति प्रवीण मसीह को विक्रेता विमलादेवी आजमानी पति हरवंश लाल आजमानी से विक्रय पत्र क्रमांक 6106 27 फरवरी .2020 को कय किया है, जिसको हल्का पटवारी कौशल यादव  द्वारा नामातरंण पंजी में  16 सितंबर 2020 को दर्ज किया गया है. नामातंरण क्रमांक 836 में खसरा नंबर 992/9 में से रकबा 0.55 एकड़ भूमि को क्रेता सुनील सिंह पिता अशोक सिंह को विक्रेता विमला देवी आजमानी पति हरवंश लाल आजमानी से विक्रय पत्र क्रमांक 6107  27 फरवरी 2020 को क्रय किया है, जिसको हल्का पटवारीकौशल यादव   द्वारा नामात्रंण पंजी में 16 सितंबर 2020 को दर्ज किया गया है.

तहसीलदार के तथ्यात्मक जाँच प्रतिवेदन के अनुसार,  तीनों विक्रय पत्र के नामातरंण पंजी के कालम 12 की प्रविष्टियों में किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा आदेश पारित किया जाना पाया गया है, जिसमें ना तो उस व्यक्ति की पद मुद्रा अंकित है और ना ही पद नाम अंकित है। (फुलेग A)। नामातरंण पंजी वर्ष 2019-20 में उपरोक्त नामातरंण प्रविष्टियों के आगे की प्रविष्टि क्रमांक 837, 838, 839 तथा पीछे की प्रविष्टि क्रमांक 833 को तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार श्री नारायण प्रसाद गबेल द्वारा प्रमाणित की गई है, परन्तु उक्त तीनों प्रविष्टियॉ बिना सील मुद्रा के अन्य व्यक्ति से प्रमाणित करवा कर अभिलेख दुरूस्त किया गया है.

तहसीलदार के तथ्यात्मक जाँच प्रतिवेदन के अनुसार, उपरोक्त बिक्री संहिता की धारा 165(7)(ख) के उल्लंघन  करके की गई है.

इसके बाद तत्कालीन एसडीएम तुलाराम भारद्वाज ने राजस्व विभाग के अधिकारी दुष्यंत कोशले, पटवारी कौशल यादव के साथ भूमि स्वामी, और क्रेता-विक्रेता को जवाब पेश करने को कहा. अनावेदक किशन यादव, अनावेदिका श्रीमती विमला देवी को छोडकर सभी ने जवाब पेश किया.

अधिवक्ता प्रकाश सिंह की शिकायत के संबंध में विस्तृत जाँच पांच सदस्यीय दल के राजस्व अधिकारी रमेश कुमार मोर, श्रीमती रिचा सिंह, राजस्व निरीक्षक निखिल झा, पटवारी अशोक ध्रुव और जीत लाल पटेल ने की. पांचों की जाँच में आया कि इन बिक्रियों में संहिता की धारा 165(7)(ख) का उल्लंघन हुआ है.

तत्कालीन एसडीएम तुलाराम भारद्वाज ने जांचोपरांत पाया कि पटवारी  कौशल यादव के द्वारा अपने कार्यकाल में 1 अक्टूबर, 2020 के बाद तत्कालीन अधीक्षक, भू-अभिलेखासे नामांतरण पंजी में मैनुअल रूप से नामांतरण का प्रमाणीकरण कराया गया, जोकि अति-गंभीर वृत्तिक कदाचार की श्रेणी में आता है एवं पद का दुरुपयोग है. इसी तरह तत्कालीन अधीक्षक, भू-अभिलेख द्वारा इन्हीं भूमियों के व्यपवर्तन का नामांतरण भी कर दिया गया. यह आश्चर्यजनक है कि एक तिथि को भी वादग्रस्त भूमि का कृषि भूमि के रूप में नामांतरण करते हैं और दूसरी तिथि को उसी वाद भूमि का व्यपवर्तित भूमि बताते हुए नामांतरण करते हैं, जो उनके द्वारा बरती गई घोर लापरवाही का सूचक है. जिससे शासन को अत्यधिक राजस्व कि हानि हुई.

तत्कालीन एसडीएम भारद्वाज के अनुसार, संक्षिप्ततः पटवारी  कौशल यादव और तत्कालीन अधीक्षक, भू अभिलेख दुष्यंत कुमार कोशले का आचरण एवं शासन के प्रति निष्ठा संदिग्ध प्रतीत होती है.

तत्कालीन एसडीएम भारद्वाज की रिपोर्ट का अवलोकन कर 13 जुलाई 2022  को अतिरिक्त कलेक्टर ने पाया कि पटवारी  कौशल यादव द्वारा उक्त भूमि आवंटन से प्राप्त होने, व्यपवर्तित भूमि होने तथा धारा 165(7)(ख)१६५ का उल्लंघन होना जानते हुए नामांतरण पंजी क्रमांक 834, 835 एवं 836 में नामांतरण प्रविष्टि दर्ज कर तथ्यों को छुपाकर दुष्यंत कुमार कोशले से नामांतरण आदेश पारित कराया, जिसके लिए वो दोषी है.

वहीं, अतिरिक्त कलेक्टर ने दुष्यंत कुमार कोशले को भी दोषी माना; क्योंकि दुष्यंत कुमार कोशले ने भी तीनों नामांतरण में इश्तहार जारी नहीं होने, क्रेता-विक्रेता के क्स्ताक्ष्रर नहीं होने सहित अन्य जानकारी प्राप्त किए बिना नामांतरण आदेश पारित कर दिया था.

इस पर अतिरिक्त कलेक्टर ने पटवारी  कौशल यादव के विरुद्ध दंडात्मक /अनुशासनात्मक कार्यवाही करने और नामांतरण की कार्यवाही निरस्त करने का  निर्देश SDO को दिया. इसी तरह दुष्यंत कुमार कोशले के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव आयुक्त संजय अलंग को प्रेषित किया गया.

इसके बाद दुष्यंत कुमार कोशले का ट्रांसफर और कौशल यादव को निलंबित कर दिया गया. बाद में कौशल यादव को यह कहकर  बहाल किया गया कि उसकी विभागीय जाँच होगी और उसके बाद जो भी रिपोर्टआएगी उसके अनुसार ही कार्यवाही की जायेगी.

 इस मामले में दुष्यंत कुमार कोशले की पहेली पेशी ADM कुरुवंशी के कोर्ट में हो चुकी है. वहीं, कौशल यादव की विभागीय जांच को लेकर  SDM श्रीकांत वर्मा ने बताया कि जाँच कर रहे हैं.

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