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बिलासपुर: प्रेस वार्ता में पत्रकारों के सवालों का ठोस जवाब नहीं दे पाए निगम कमिश्नर अजय त्रिपाठी

बिलासपुर. स्वच्छता में बिलासपुर को 114 शहरों में से 7वां रैंक मिला है इसको लेकर आज  विकास भवन के  दृष्टि सभा कक्ष में प्रेसवार्ता हुई.इस दौरान शहर की बदहाली को लेकर  पत्रकारों के द्वारा उठाए गए सवालों के ठोस जवाब देने में असहाय नजर आए निगम कमिश्नर अजय त्रिपाठी. 

जब मीडिया  के द्वारा निगम कमिश्नर अजय त्रिपाठी  को सवाल  के माध्यम से अवगत कराया गया कि शहर बदहाल है, अमृत मिशन और सीवरेज के कार्य बिना प्लानिंग से चलने के कारण शहर की सड़कें जर्जर हो गयी हैं, जो राजस्व निगम को आना चाहिए वो लंबे समय से अंगद की पांव की तरह जमे अधिकारियों के जेब में जा रहा है, महिला समृद्धि बाज़ार में ज्यादातर पुरुष  व्यवसायी  नियम विरुद्ध  कब्जा  किये हैं ,सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन संजय दुबे द्वारा निगम की जमीन में नियम विरुद्ध  आलीशान भवन तान दिया गया है और साथ ही 30 फीट के आम रास्ता को भी अपने कब्जे में लेकर बंद कर दिया गया है और शहर के एक  तालाब में मॉल बन गया है. 
इन सभी सवालों का जो जवाब  कमिश्नर त्रिपाठी ने दिया पर उसमें गंभीरता कम, औपचारिकता ज्यादा नजर आयी, क्योंकि ज्यादातर सवालों के जवाब में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से फाइल मंगवाकर, उसका अपडेट देखने के बाद ही आगे की कार्यवाही करने की बात कही, जो आने वाला हर जिम्मेदार निगमायुक्त कहता है पर होता जाता कुछ नहीं है.
प्रेसवार्ता में उपस्थित रामशरण यादव और सभापति नजीरुद्दीन शहर की बदहाली से भली भांति परिचित हैं पर इस मामले में  वे नपा तुला बोलने में  ही अपनी समझदारी दिखाई. जब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी तो शहर की बदहाली को लेकर ये  दोनों नेता अपने  पार्टी नेताओं के साथ  लगातार भाजपा को कटघरे में खड़ा करते थे . इससे मुद्दे मीडिया के समक्ष आते थे. आज मुद्दे वहीं खड़े हैं और मीडिया भी वही  है बस परिवर्तन हुआ है तो मुद्दा  उठाने वाले नेताओं का, क्योंकि इनकी सरकार सत्ता में आ गयी है .  इस कारण इन्हें  शहर की बदहाली नजर नहीं आती है या फिर यह भी कहा जा सकता है कि बदहाली नजर तो आती है पर ठोस  निराकरण की  दिशा में  कार्य करने  का साहस इन लोगों में नहीं है.
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