वीरेन्द्र दुबे ने कहा- साहब! समस्या ही पैदा मत करिए तो कोई नहीं आएंगे संचालनालय…

पंचायत संचालनालय के डायरेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा के जारी आदेश पर शिक्षाकर्मी संघ ने दी प्रतिक्रिया

 

रायपुर। शिक्षाकर्मी अपनी विभिन्न समस्या को लेकर जान की बाजी लगाते हुए संघर्ष कर रहे हैं। इधर, शासन-प्रशासन के लगातार आश्वासन के बावजूद शिक्षाकर्मियों की समस्या जस की तस है। इसके चलते शिक्षाकर्मी कलेक्टोरेट, जिला पंचायत सीईओ से लेकर पंचायत संचालनालय तक चक्कर काट रहे हैं। इस पर पंचायत संचालनालय के डायरेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा ने एक आदेश जारी कर शिक्षाकर्मियों के संचालनालय आने पर रोक लगा दी। इससे शिक्षाकर्मियों में गहरी नाराजगी है।
शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र दुबे ने कहा कि समस्याएं हैं इसलिए समाधान के रास्ते तलाशे जाते हैं। संविलियन देकर आप हमारी समस्याओं का अंत कर दीजिए। हम आपकी चैखट पर अनावश्यक क्यों आएंगे। जनपद और जिला पंचायत से अपनी समस्याओं का निदान ना पाने से निराश शिक्षक पंचायत ही संचालनालय की चैखट पर कदम रखते है। आप समस्या ही पैदा मत करिए तो कोई नहीं आएंगे संचालनालय। न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी। वीरेन्द्र दुबे के इस कथन को स्पष्ट करते हुए शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रांतीय प्रवक्ता जितेन्द्र शर्मा ने कहा कि शिक्षक पंचायत संवर्ग अपने प्रादुर्भाव काल से समस्याओं से पीड़ित है। शिक्षा,पंचायत, नगरीय निकाय, ट्रायवल जैसे कई पाटों में पीस रहे हैं। 1998 से आज तक नियमित वेतन की व्यवस्था नही बन पाई। आबंटन ना होने पर जनपद जिला हाथ झड़ा देते हैं और वे खुद ही कहते है संचालनालय जाकर एलाट ले आओ। एलाटमेंट होने पर भी कई बार लापरवाहियों के चलते वेतन नही दे पाते। अनुकम्पा, पदोन्नति, स्थानांतरण ऐसे मुद्दे हैं जो जनपद और जिला में निराकृत नहीं हो पाते। पंचायत विभाग शिक्षाकर्मियों के मामलों को ठीक से समझ और हल नही कर पाता, क्योंकि वह विशुद्ध पंचायती राज के मामलों में ज्यादा रुचि रखता है, जबकि शिक्षाकर्मियों की समस्याएं शिक्षा विभाग के कर्मचारियों जैसी है। इसलिए जनपद पंचायत और जिला पंचायत के सीईओ भी शिक्षक पंचायत संवर्ग की समस्याओं का निराकरण नहीं कर पाते और इस बात से डारेक्टर पंचायत भी इत्तेफाक रखते है। वो खुद भी कई बार इस बात को स्वीकार चुके हैं कि जनपद और जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को शिक्षक पंचायत संवर्ग के विषय मे जानकारी का अभाव होता है। इसलिए समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हो पाता। इसलिए इन सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान है कि शिक्षक पंचायत संवर्ग का शिक्षा विभाग में शासकीयकरण संविलियन कर दिया जाए, ताकि राज्य सरकार के कर्मचारियों की भांति हमारी समस्याओं का अंत हो सके।
उटपटांग आदेश से भड़केगा आक्रोश
राज्य शासन ने शिक्षक पंचायत संवर्ग की समस्याओं को लेकर कमेटी का निर्माण किया था, जिसका कार्यकाल 5 मार्च को समाप्त हो चुका है। मगर फिर अब तक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ना शासन को सौंपी है, ना ही इस संवर्ग की समस्याओं का अंत किया है। ऐसे में इस तरह का फरमान और आग में घी डालने का काम करेगा। सरकार समस्याओं को हल करने के बजाय उटपटांग आदेश प्रसारित करा रही है, जिससे शिक्षाकर्मियों सहित आमजन भी आक्रोशित हो रहे हैं।

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