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कोलवाशरी के लिए जनसुनवाई में मचेगा जमकर हंगामा, 11 गांव के ग्रामीण और सरपंचों ने बनाई योजना…..

भयंकर विरोध के बावजूद प्रशासन के सहयोग से घानापार घुटकू में कोलवाशरी खोलने की तैयारी

बिलासपुर। 11 गांवों के ग्रामीण और सरपंचों के भयंकर विरोध के बावजूद प्रशासन ने घानापार घुटकू में 2.5 एमटीएन क्षमता की कोलवाशरी लगाने पूरी तैयारी कर ली है। कोलवाशरी खुलने से होने वाली समस्या से ग्रामीण भलीभांति वाकिफ है। इसके चलते वो किसी भी सूरत में कोलवाशरी खोलने के पक्ष में नहीं है। लेकिन प्रशासन के आगे ग्रामीणों की एक नहीं चल रही है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रस्तावित कोलवाशरी की पुरजोर विरोध करने की योजना बना ली है। जाहिर है यहां कोलवाशरी शुरू होने को लेकर शासन-प्रशासन को भी अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा।

भाजपा सरकार पर हमेशा से उद्योगपतियों के पक्षधर होने का आरोप लगता रहा है। चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह मिशन 65 प्लस को लेकर कर रहे हैं। ऐसे में घानापार घुटकू में प्रस्तावित कोलवाशरी के खुलने का मामला भी तूल पकड़ सकता है। आपकों बता दें कि पारस पावर एण्ड कोलवाशरी प्राइवेट लिमिटेड का घानापार घूटकू समेत प्रभावित 11 गाव के ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। प्रभावित गांवों के ज्यादातर सरपंचो और ग्रामीणों ने बताया कि दो एक सरपंचो को खरीदकर कोलवाशरी शुरू की जा रही है। लेकिन घानापार कोलवाशरी को किसी भी सूरत में शुरू होने नहीं दिया जाएगा। क्योंकि पारस पावर प्लांट के मालिकों ने ज्यादातर पंचायतों ने एनओसी ली ही नहीं है। कुछ सरपंचों ने बंद कमरे में प्लांट के मालिकों को सहमति देकर अपनी जेब भर ली है। कोलवाशरी का विरोध करने वाले ग्रामीणों के नेता दिलीप अग्रवाल ने बताया कि घूटकू में कोलवाशरी का जाल बिछ गया है। हजारों एकड़ जमीन बंजर हो चुकी है। सैकड़ों लोग बड़े बड़े वाहन की चपेट में आकर जान गवां चुके हैं। कोल डस्ट के प्रभाव में आने से रोगियों की संख्या बढ़ गयी है। लेकिन प्रशासन और प्लांट मालिकों को इससे कोई सरोकार नहीं है। पावर और गुंडागर्दी के दम पर लोगों की आवाज दबाई जा रही है। जबरदस्ती जमीनों को छीना जा रहा है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। 9 मार्च को जनसुनवाई के दौरान प्लांट का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

जनसुनवाई 9 को, मचेगा बवाल

दिलीप अग्रवाल ने बताया कि कब सर्वे हुआ किसी को जानकारी नहीं है। ऊपर से ही फैसला ले लिया जाता है कि निर्धारित स्थान पर कोलवाशरी खोला जाएगा। कुछ सरपंच भी इसमें शामिल हैं। उनका कहना है कि प्लांट में सरपंच की नहीं, बल्कि गरीब किसानों की जमीन जाती है। सरपच मोटी रकम लेकर शहर चला जाता है। गांव में घुटकर जीने ग्रामीण मजबूर होंगे। इसकी चिंता ना तो जिला प्रशासन को है और ना ही पर्यावरण मंत्रालय को। जनसुनवाई तो सिर्फ खानापूर्ति के लिए होती है। लेकिन इस बार जनसुनवाई का अर्थ भी होगा। कोलवाशरी के मालिकों को भी अहसास दिलाया जाएगा कि चंद रूपयों के लालच में किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने नहीं दिया जाएगा।

प्लांट मालिक कर रहे प्रशासन से धोखाधड़ी

घानापार घुटकू में स्थापित होने वाले पारस पावर एण्ड कोलवाशरी प्लांट के मालिकों ने जमकर धांधली की है। दस्तावेजों और सूत्रों के मुताबिक प्लांट मालिकों के पास न तो जल बोर्ड का एनओसी है और ना ही अन्य जिम्मेदार विभागों का अनापत्ति पत्र। जानकारी मिली है कि जैन परिवार को घानापार में पहले से ही 0.99 एमटीएन क्षमता का प्लांट स्थापित करने की अनुमति है। लेकिन प्लांट मालिकों ने पुराने प्लांट के दस्तावेजों को ही आधार मानकर 2.5 एमटीएन प्लांट खोलने की तैयारी कर ली है। केन्द्रीय और स्थानीय प्रशासन को अंधेरे में रखकर धोखाधड़ी का तानाबाना गूंथा गया है।

प्रशासन से नहीं किया पुरानी अनुमति का जिक्र

घानपार में ही प्लांट मालिकों को 0.99 एमटीएन का प्लांट स्थापित करने की पूर्व में अनुमति मिली थी। इस दौरान प्लांट मालिकों ने 0.99 एमटीएन के लिए जल बोर्ड से पानी के लिए एनओसी ली। अब उसी एनओसी का उपयोग 2.5 एमटीएन वाले प्लांट में हो रहा है। शासन के सामने पेश किए गए दस्तावेजों में पुराने पालंट का जिक्र भी नहीं किया गया है। जबकि 2.5 एमटीएन कोलवाशरी के लिए नए सिरे से सभी जिम्मेदार विभागों और प्रभावित गांव सरपंचों से एनओसी जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है।

लोगों में भड़क रही गुस्से की आग

ताज्जुब की बात है कि घानापार में नया प्लांट खोला जाएगा। इसकी जानकारी 11 गांव के ज्यादातर सरपंचों को ही नहीं है। लेकिन क्षेत्रिय परिवहन कार्यालय में सबका एनओसी है। फिलहाल जानकारी के बाद ग्रामीणों और सरपंचो में भयंकर आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि जब से घूटकू क्षेत्र में कोलवाशरी खुलना शुरू हुआ है, तब से फसल चैपट हो गयी है। हजारों एकड़ जमीन बंजर हो गई है। खेत के खेत बांझ हो रहे हैं। चारो तरफ धूल ही धूल है। प्लांट खुलने से पहले सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन बाद में सब टायं टाय फिस्स हो जाता है। प्लांट खुलने और खेत बंजर होने के बाद अच्छे खासे किसान दिहाड़ी मजदूर बनकर रह जाते हैं। इससे लोगों में गुस्से की आग भड़क रही है।

शासन लोगों को लगा दे मौत का इंजेक्शन

घानापार के लोगों ने बताया कि जिस स्थान पर कोलवाशरी को खोला जाना है, उसके आसपास गांव की बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। कोल डस्ट से बहुत प्रकार के रोग होते हैं। इस बात को सभी लोग जानते हैं। कैंसर, अस्थमा, टीबी जैसे भंयकर रोग कोयले के धूल से ही होते हैं। गंभीर रोग के शिकार लोग घुट-घुटकर मरने को मजबूर होते हैं। यदि सरकार को कोलवाशरी वालों से इतना ही प्यार है तो ग्रामीणो को घुट घुटकर मारने की वजाय मौत का इंजेक्शन लगा दे। इससे बस्ती भी साफ हो जाएगी। प्लांट  का विरोध भी नहीं होगा।

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