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नसबंदीकांड के लिए बदनाम शहर में कुत्तों की नसबंदी कराने की तैयारी…..

बिलासपुर। नसबंदी का नाम सुनते ही शहर के लोग दहल जाते हैं। नसबंदीकांड से महिलाओं की हुई 13 मौत का मंजर आज भी लोगों के दिलो दिमाग में छाया हुआ है। ऐसे में शहर की सरकार अब कुत्तांे की नसबंदी करवाने जा रही है। इनका क्या हाल होगा यह सोचकर कुत्ता मालिक भयभीत हैं।
यहां नसबंदी का रिकार्ड इतना खराब हो चुका है। पहले महिलाओं की नसबंदी नेता जी के कार्यकाल में हुआ था, जिसमे 13 महिलाएं अपनी जान गवां चुकी है। इससे कितने बच्चे अनाथ हो गए। इस घटना ने पूरे प्रदेश के अलावा देश-विदेश तक में हाहाकार मचा दिया था। इसके बावजूद नेताजी का हंसते हुए अखबार फोटो आया था। फिर अपना दोष किसी और के ऊपर मढ दिया और छुट्टी पा ली गई। फिर पुरुषों की नसबंदी हुई तो उसमें भी पुरुषों को जान के लाले पड़ गए। यहां की सरकार भी नसबंदी को खेल समझ कर लोगांे की जान से खेलती है। इसलिए लोगों की जान पर बन आती है। अब शहर के कुत्तों की नसबंदी होने जा रही है। कल कोई निगम में बता रहा था अब इनका क्या हाल होगा, ये भगवान की जाने।

नेताजी की चाबी भरने से चल रहे महापौर, शहर की नहीं चिंताः पाण्डेय

शैलेष ने कहा कि भैया जी आपकी पार्टी के लोग आपके द्वारा बनाये गए महापौर की इज्जत नहीं करते। उसका बहुत मजाक उड़ाते है। कोई कह रहा था कि ये सब आपके इशारे में हो रहा है, क्योंकि आपको इश्र्या होती है उनसे क्योंकि वो 35000 वोट से जीते थे। कुछ लोग यह भी कह रहे थे कि वो भी बीजेपी की तरफ से अगले चुनाव में दावेदारी बिलासपुर से कर रहे है, इसलिए उनका मजाक उड़ा उड़ाकर शहर में उनकी छवि धूमिल की जा रही है।

पाण्डेय ने  कहा कि महाापौर सीधे है। सुना है जितनी आप चाबी भरते हो उतना ही चलते है। निगम के पार्षद भी यही कह रहे थे कि वो आपसे बहुत डरते है, इसलिए आपसे बिना पूछे कोई कार्य नहीं करते है। अभी तक बिलासपुर में ऐसा महापौर हमने भी नहीं देखा जो शहर की दुर्दशा की चिंता नहीं करता है। लोगों की तकलीफ उनको नहीं दिखती है। लोगों की जिंदगी से उनको कोई मतलब नहीं है, लेकिन आप पदयात्रा में जाने वाले हो, इसलिए बहुत गंभीर होकर रोज मीटिंग लेकर तैयारी कर रहे है। इतनी जिम्मेदारी से शहर की चिंता की होती तो शहर का यह हाल नहीं हुआ होता। मुख्य न्यायाधीश ने भी शहर आने को मना कर दिया था। इतना बुरा हाल करवा दिया है लेकिन आपकी उनको बहुत चिंता है। शायद आपने उनको जैसे नौकरी में रखा हो। जैसे शहर के लोगों की भावना और विश्वास को जिस प्रकार आपके नेतृत्व में ठोकर लगी है, उतना तो किसी दुश्मन से भी नहीं मिली होगी। खैर आने वाला चुनाव में जनता आप को अच्छे से बताएगी।

 

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