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80 लाख भ्रष्टाचार करने के आरोप से घिरे विकास गुरूदिवान को बना दिया सीईओः मनीशंकर…..

बिलासपुर। भाजपा सरकार के राज में किस तरह नियम-कायदे को ताक पर रख दिया गया है, इसकी बानगी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में निलंबित व्यक्ति को सीईओ बनाने में दिख रही है। विकास गुरूदिवान निलंबित है तो उसे किस आदेश के तहत सीईओ बनाया गया है।
यह सवाल जनता कांग्रेस जे के प्रवक्ता मनीशंकर पाण्डेय ने उठाया हैं उन्होंने कहा है कि निलंबित व्यक्ति को किसके आदेश से बहाल किया गया है यह सब साफ सरकार की मंशा को उजागर करता है कि सरकार कैसे नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुये भ्रष्टाचारियों को प्रश्रय देकर खुद भ्रष्टाचार को बढ़ावा  दे रही है। उन्होंने कहा कि निलंबित सीईओ विकास गुरूदिवान कैसे बैठक ले सकता हैं, कैसे शासकीय आदेश कर सकता, कैसे ट्रांसफर आदेश जारी कर सकता है कहां गया रमन सिंह का नियम कानून । जीरों टारलेंस की बात क्या यही है सबका साथ सबका विकास। उन्होंने कहा कि जिला सहकारी बैंक के वर्तमान सीईओ विकास गुरूदिवान पर 80 लाख के भ्रष्टाचार का आरोप है। इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बावजूद उसे सीईओ बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में तोरवा मंडी के ब्रांच मैनेजर थे, तब 80 लाख का भ्रष्टाचार हुआ था। उन्होंने कहा कि अपने अधिकार क्षेत्रों से बाहर जाकर अनियमितता की गई है। हितग्राहियों को 5 लाख ऋण स्वीकृत करने का पावर था, लेकिन इन्होंने आठ लाख तक का लोन स्वीकृत किया। ये सारी बातें जांच में पाई गई है। इसके बावजूद अब तक उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जब खुद अपने पिता रूपचंद गुरूदिवान के नाम पर 7 लाख का लोन स्वीकृत किया था। इसका भी खुलासा जांच में हुआ। इसके बाद भी जीरो टारलेंस की बात करने वाले रमन सिंह की सरकार में कोई कार्यवाही नहीं होना संदेहास्पद है। इससे साफ हो गया है खुद भी खाओ हमें भी खिलाओ, तभी तो भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद भी विकास गुरूदिवान सीईओ बन कर बैठा हुआ हैं।

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