बूढ़ा महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वंयभू है …….

 

बिलासपुर। आज महाशिवरात्रि पर्व पर एक ऐसे अदभूत,अलौकिक,और रहस्यमय स्वयं भू शिवलिंग के बारे में बताने और दर्शन कराने जा रहे है जिसके दर्शन मात्र से आपका रोम -रोम शिवमय हो जायेगा। बिलासपुर से महज 25 किलोमीटर दूर मां महामाया की पावन नगरी रतनपुर जिसे लहुरीकाशी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर रामटेकरी के ठीक नीचे स्थापित है बूढ़ा महादेव का एक अति प्राचीन मंदिर इस मंदिर को वृध्देष्वरनाथ के नाम से भी पुकारा और जाना जाता है।

कहते है कि इस बूढ़ा महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वंय   भू है और यदि इसे गौर से देखें तो भगवान शिव की जटा जिस प्रकार फैली होती है ठीक उसी प्रकार दिखलाई देता है। शिवलिंग के तल पर स्थित जल देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानों पुरी आकाश गंगा या ब्रम्हांण्ड इसमें समाया हुआ हो। इस शिवलिंग में जितना भी जल अर्पित कर ले उसका जल उपर नहीं आता और शिवलिंग के भीतर के जल का तल एक सा बना रहता है इस शिवलिंग पर चढ़ाया जल कहां जाता है यह आदिकाल से आज तक इस रहस्य को कोई ना जान सका। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के इस अदभुत शिव लिंग पर जलाभिषेक करने हजारों लाखों की तादात में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। हरहर महादेव के नारों से गुजनयान जयकारों के साथ यहा दूर -दूर से लोग जल लेकर बूढ़ा महादेव को चढ़ाते हैं ।

इस मंदिर को लेकर अनेक किवदंती है इस अदभुत मंदिर के बारे में पुजारी कृष्ण कुमार दुबे कहते हैं कि वर्षों पहले एक वृद्धसेन नामक राजा हुआ करता था जिसके पास अनेकों गाय हुआ करती थी जिसे लेकर चरवाहा जंगल में चरानें जाता था तो उसके साथ चरने गई गायों में एक गाय झुण्ड से अलग होकर बांस के घनी घेरे धेरे घुस जाया करती थी और वहां अपने थनों से दुग्ध छरण कर रुद्राभिषेक किया करती थी यह कार्य प्रति दिन होता था। चरवाहे नें गाय का रहस्य जान इस बात की जानकारी राजा रुद्रसेन को दी राजा ने भी इस बात की पुष्टि कर आश्चर्य किये बिना ना रह सका। लेकिन राजा को बात समझ नहीं आई उसी रात भगवान ने राजा को स्वप्न देकर अपने होने का प्रमाण दिया और उस स्थान पर मंदिर बनाये जाने और पूजा किये जाने की बात कही। और इस प्रकार राजा वृध्दसेन ने अपने नाम के साथ भगवान का नाम जोड़कर मंदिर का नाम वृद्धेश्वर मंदिर रखा। आज भी सावन के पवित्र मास में हजारों की तादात में भक्तों के साथ साथ कांवरिये आते है और भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ा अपनी मनोकमना करते हैं ।

स्थानीय लोगो का कहना है कि यह अति प्राचीन मंदिर है 1050 ई में राजा रत्नदेव दवारा इस मंदिर का र्जीणोध्दार किया गया था। यह मंदिर कितना पुराना है और शिवलिंग पर किये अभिषेक का पवित्र जल कहां चला जाता है इस बात की सही जानकारी आज भी किसी के पास नहीं है इसलिये तो बूढ़ा महादेव मंदिर और शिवलिंग का रहस्य आज भी लोगों के लिये रहस्य और चमत्कार से कम नहीं है।

ब्रेकिंग
बिलासपुर: यदुनंदन नगर में महिला के घर घुसा एक युवक, जानिए उसके बाद क्या हुआ, देखिए VIDEO बिलासपुर: अधिवक्ता प्रकाश सिंह की शिकायत पर एडिशनल कलेक्टर कुरुवंशी ने जाँच के बाद दुष्यंत कोशले और ... बिलासपुर: सारनाथ एक्सप्रेस दिसंबर से फरवरी तक 38 दिन रद्द, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किलें बिलासपुर: भाजपा-कांग्रेस के नेता नूरा-कुश्ती के तहत आदिवासी को ही चाहते हैं निपटाना: नेताम बिलासपुर: खमतराई की खसरा नंबर 561/21 एवँ 561/22 में से सैय्यद अब्बास अली, मो.अखलाख खान, शबीर अहमद, त... बिलासपुर: पति की अनुपस्थिति में दीनदयाल कॉलोनी निवासी लक्की खान ने पत्नी के साथ कर दी अश्लील हरकत, ज... बिलासपुर: मुख्यमंत्री जी! इन मामलों की जाँच अपने निगरानी में करवाइए, तभी इसमें संलिप्त जमीन दलालों क... बिलासपुर: बड़ी संख्या के साथ संघ ने निकाला पथ संचलन, जय श्री राम के जयघोष से गूंज उठा बुधवारी फुटबॉल... बिलासपुर: मुख्यमंत्री जी! शासन की छवि खराब करने वाले पी दासरथी और विकास तिवारी पर मेहरबान रहने वाले ... बिलासपुर: ठगी के आरोपी विशाल संतोष सिंह, संतोष सियाराम सिंह और नूतन संतोष सिंह को गिरफ्तार करने में ...
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9977679772