कब मिलेगा मुआवजा ……

बिलासपुर /छत्तीसगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना द्वारा रतनपुर कोटा लोरमी मार्ग का निर्माण लगभग पचास किलोमीटर और तकरीबन 106 करोड़ की लागत से जिंदल पी आर एल इन्फा्रस्ट्रक्चर जे व्ही बिलासपुर दवारा नियम कायदों को ताक पर रख किया जा रहा है जो लगभग पूर्णत: की ओर है। किन्तु ग्रामीणों की अधिग्रहित जमीन का बगैर मुआवजा दिये पिछले दो सालों से बनने वाली एडीबी की सड़क अपने निर्माण के दौरान गुणवत्ता और अवैध उत्तखनन को लेकर सुर्खियों में बनी रही अब जब इस सड़क का कार्य पूर्ण होने को है तो यहां बसने वाले ग्रामीणों और किसानों को उनकी अपनी जमीन जो एडीबी दवारा सड़क बनाये जाने के दौरान मुआवजे का आश्वासन देकर दो साल पहले अधिग्रहण किया गया था जिसका मुआवजा अब तक नहीं मिला है जिसके चलते ग्रामीणों नें बीच सड़क पर तंबू गाड़ प्रदर्शन करना आरंभ कर दिया है।

वहीं जानकारों की माने तो यह प्रदर्शन ठेकेदार और अधिकारियों के द्वारा किसानों को प्रायोजित ढंग से कराया जा रहा है ताकि तीन माह बाद सड़क निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद भी भूअधिगृहित किसानों को यदि मुआवजा नहीं मिल पाता तो ठेकेदार को 10 प्रतिशत का जूर्माना लगेगा जिससे बचनें के लिये अधिकारी और ठेकेदार नें मिलकर यह प्रायोजित आंदोलन व प्रदर्शन करवाया है जिससे शासन दवारा शीघ्र ही लोगों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जा सके और ठेकेदार जूर्मानें से बच सके।

एडीबी दवारा जिंदल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड कंपनी के ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण का काम कराया जा रहा है पिछले इक्कीस माह से किसानों नें मुआवजे राशि के भुगतान के लिये किसी प्रकार से कोई मांग नहीं कि जिसका जीता जागता उदाहरण अरपा भैंसाझार परियोजना है जिसकी मुआवजा राशि आंदोलन के बाद भी यहां के बहुत से ग्रामीणों को आज भी अप्राप्त है। जानकारों की मानें तो इस सड़क निर्माण कार्य के पूर्ण हो जाने पर भूमि अधिग्रहित किसानों को मुआवजा स्वीकृत करा राशि दिलाऐ जाने की जवाबदारी जितनी प्रशासन कि है उतनी ही ठेका कंपनी की भी है।

ग्रामीणों की माने तो ठेकेदार को सड़क निर्माण के लिये प्रशासन नें खूली छुट दे रखी थी ना तो पर्यावरण विभाग नें सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा की ओर ही ध्यान दिया ना खनिज विभाग नें स्थानीय स्तर में हो रहे अवैध उत्तखनन पर रोक लगानें कोई कदम उठाया। वहीं ना ही वन विभाग जिम्मेदार अधिकारियों नें वनों को बचानें कोई कार्यवाही की। संबंधित विभाग के आला अधिकारी अपना अपना पल्ला झाड़ते नजर आते रहे। ग्रामीणों नें लगातार पहाड़ों को काटकर व खोद कर ले जाई जा रही मुरम, मिट्टी और प्रदूषित होते वातावरण पर रोक लगाने संबंधित विभाग को शिकायत की किन्तु ऊंची पहुंच और चांदी की चमक नें अधिकारियों के आखों को बंद कर दिया। वहीं ठेकेदार को सड़क निर्माण कार्य की राशि देने में शासन दवारा निर्धारित समय पर भुगतान किया जाता रहा है।

जानकार तो यहां तक सवाल उठाते हैं कि बरसों पहले हुए पीडब्लूडी के सड़क निर्माण में अधिग्रहित भूमि के बाद दोनों ओर सरकारी जमीन होने के बाद भी फिर से भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की बात कहां से आ गई जबकि सड़क के दोनों ओर सरकारी जमीन पहले से ही थी भले ही ये जांच का विषय हो किन्तु सवाल तो उठना लाजमी ही था कि आखिरकार सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा कर खुद को जमीन मालिक बता मुआवजे की मांग करने वाले और उन्हे मुआवजा का हकदार बतलाने वाले अधिकारी कहीं शासन को चूना लगा खुद की जेब गर्म करने की फिराक में तो नहीं।

कोटा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 14 धरमपुरा अमाली मोड़ पर बीच सड़क में मुआवजे की मांग लेकर बैठे किसानों की मानें तो उन्हे भी सर्वे के बाद ही शीघ्र मुआवजा राशि भुगतान किये जाने का भरोसा सड़क निर्माण ठेकेदार ने किया था लेकिन सड़क निर्माण को लेकर आये दिन शिकायतों से परेशान ठेकेदार निर्माण कार्य और शिकायतों के निराकरण में जांच में आये अधिकारियों की जी हुजूरी में हमे तो भूल ही गया था। अब जाकर उसके समर्थन से मुआवजे की मांग हमारे द्वारा की जा रही है।

बहरहाल दो साल में लगभग सात मीटर चौड़ी सड़क पर सौ से अधिक पुल पुलिया के निर्माण के बाद ठेकेदार अपना बोरिया बिस्तर समेटनें को है सड़क और उस पर बनाये पुल -पुलिया की गुणवत्ता की परख तो वाहनों की आवाजाही और पहली बरसात के बाद होगी किन्तु मुआवजे की आस में ग्रामीण आंदोलनरत है देखना होगा कि शासन -प्रशासन पहले किसे राहत प्रदान करते हैं । क्या किसानों को मुआवजा मिल पायेगा या ठेकेदार ग्रामीणों को बगैर मुआवजा दिलाये ही फिर किसी दूसरे क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिये भोले -भाले ग्रामीणों को मुआवजे का झुठाआश्वासन देकर एक बार फिर उनके ही क्षेत्र से खनिजों का अवैध दोहन कर सड़क निर्माण कार्य में लग जायेगा।

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