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सिम्स :धुएं के कारण नहीं हुई बच्चों की मृत्यु

बिलासपुर/ CIMS के नवजात गहन चिकित्सा ईकाई में हुई घटना के बाद प्राईवेट अस्पतालों में स्थानांतरित किए गए बच्चों की हुई मौत की शुरूआती जांच की गई है। इसकी जानकारी CIMS चिकित्सा अधीक्षक और संयुक्त संचालक डाॅ. बी.पी. सिंह और शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. राकेश नहरेल ने दी। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की असमायिक मौत हुई वो पहले से गंभीर स्थिति में भर्ती हुए थे। उन्होंने ये भी साफ किया कि  किसी भी नवजात की मौत आग से जलने या फिर धुएं के कारण नहीं हुई है।
 

बच्चों की मौत के पीछे की सच्चाई कया है ? 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शव परीक्षण जिला चिकित्सालय में बच्चों की मौत के पीछे की सच्चाई जानने के लिए एक गठित टीम के द्वारा जिला अस्पताल में शव परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। दरअसल फिलहाल निजी चिकित्सालय में भर्ती नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज के लिए विभागाध्यक्ष शिशुरोग CIMS के निगरानी में दो शिशु रोग विशेषज्ञ हर रोज उपचार प्रक्रिया में शामिल हैं। उन्होंने आगे बताया कि गहन नवजात चिकित्सा ईकाई में गंभीर रुप से बीमार नवजात शिशु भर्ती किए जाते हैं जिसमें मृत्यु दर सामान्य शिशु मृत्यु दर से काफी अधिक होता है। 

CIMS चिकित्सालय में हुए प्रसव के दौरान गंभीर नवजात शिशुओं को गहन नवजात चिकित्सा में उपचार के लिए भर्ती किया जाता है। इसके अलावा कई शासकीय और गैर-शासकीय अस्पतालों से भी गंभीर अवस्था के शिशुओं को यहां उपचार के लिए भेजा जाता है। CIMS में नवजात शिशु गहन चिकित्सा ईकाई में शिशु की मृत्यु दर का प्रतिशत किसी भी बड़े शासकीय संस्थाओं से कम है। 

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