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कहां है 40 हाथी, जमीन निगल गई या खा गया आसमान…….

बिलासपुर -(सत्य प्रकाश पांडेय)- अरे तुम उस तरफ कहाँ जा रहे हो… वो मुसीबत में हैं, हाथियों से घिरे हुए हैं ऐसे में हम वहां जाकर क्यों मुसीबत मोल लें। वो अपनी सुरक्षा खुद कर लेंगे, ठण्ड बहुत हैं और हमारे पास रौशनी का कोई इंतज़ाम नहीं। चलिए सर लौट चलते हैं जो होगा सुबह देखेंगे … ये वक्तव्य वन अमले के एक जिम्मेदार कर्मचारी का है जो अपने रेंज अफसर को कह रहा है घर लौट चलते हैं जो होगा सुबह देखेंगे। ये वाक्या बुधवार की रात बेलगहना रेंज के ग्राम खोंगसरा स्थित माटीनाला के पास का है। 
कटघोरा वन मंडल से मरवाही जंगल के रास्ते बेलगहना रेंज में पहुंचे 40 हाथी के परिवार को लेकर बिलासपुर जिले का वन अमला कितना संवेदनशील और ग्रामीणों की सुरक्षा के प्रति  गंभीर है ये मैंने पिछले दिनों खोंगसरा में करीब से देखा। करीब 10 दिन से जिले में हाथियों का परिवार अपनी धमक से ग्रामीणों में दहशत पैदा किये हुए हैं। इन दस दिन में हाथियों के इस बड़े परिवार ने किसी तरह की ना तो तबाही मचाई है ना ही किसी की जान को खतरा पैदा हुआ। हाँ थोड़ी बहुत फसल को नुकसान जरूर हुआ है। हालांकि खबरे जंगल के रास्ते ये बाहर आती रहीं की 40 हाथी का परिवार जमकर आतंक और उत्पात मचा रहा है। जंगल के भीतर आयातित बाहरी लोग कब्जा जमाकर वन्य जीवों के रास्ते में बाधा बने हुए हैं और सरकारी तंत्र शासन की मंशा का हवाला देखकर पंगु बना हुआ है। बिलासपुर जिले में मौजूद 40 हाथी का परिवार पिछले 3 दिन से ग्राम बगबुड के जंगल में है, इस बात का पुख्ता प्रमाण ये है की बुधवार की दोपहर से जिले का वन अमला हाथियों की जंगल में वर्तमान स्थिति पर कुछ भी बता पाने में जहां खुद को लाचार महसूस कर रहा था वहीँ दिन ढलने के बाद हाथियों का परिवार ग्राम बगबुड में उसी घर के करीब पहुंचकर चिंघाड़ने लगा जहां मंगलवार की रात उन्होंने फसल खाई थी। खबर जब खोंगसरा वन कार्यालय पहुंची तो बेलगहना रेंज अफसर कुछ कर्मचारियों के साथ माटीनाला तक पहुंचे। मैं अपने साथी के साथ मौके पर ही खड़ा था, चूँकि रौशनी का कोई इंतज़ाम नहीं होने से जंगल के भीतर अकेले जाना सम्भव नहीं था। वन अमले को देख कुछ उम्मीद जगी लेकिन कुछ ही मिनट रुककर अफसर कर्मचारी ये कहते हुए वापस लौट गए जो होगा सुबह देखेंगे।
  
सबसे बड़ी विडंबना ये है की वन अमला जंगल के भीतर जाना नहीं चाहता, भीतर की जानकारी ग्रामीण देते हैं  चूँकि इलाके में हाथी हैं इस कारण ग्रामीण जंगल में जाने से इन दिनों परहेज कर रहें हैं। अब स्थिति ये है की पिछले तीन दिन से विभाग ये पता नहीं कर पा रहा की ग्राम बगबुड के जंगल में बुधवार को मौजूद 40 हाथी का परिवार किस तरफ है ? हाथी जैसे विशालकाय जानवर को लेकर विभागीय अनभिग्यता कई सवाल खड़े करती है लेकिन फिलहाल हाथियों की कोई जानकारी ना होने की बात कहकर विभाग ये सोचने पर जरूर मजबूर करता है की 40 हाथी को क्या जमीन निगल गई या आसमान खा गया।
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