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साढ़े चार साल के कार्यकाल में मोदी सरकार के पहले मंत्री ने दिया इस्तीफा, मंजूर

 

 राष्ट्रीय/अटकलें कल से ही थीं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की एमजे अकबर और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भेंट के बाद इसकी संभावना प्रबल हो गई थी, लेकिन बताते हैं कि बुधवार को मी टू अभियान के तहत बने दबाव ने सरकार को एमजे अकबर से इस्तीफा लेने को मजबूर कर दिया। संघ के सह सरकार्यवाह भी एमजे अकबर पर कार्रवाई चाहते थे।

तमाम दबाव के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी एमजे अकबर के इस्तीफे के लिए अपनी सहमति दे दी और प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्य को इस्तीफा देने के लिए कह दिया। अकबर के इस्तीफा देने के बाद इसे मंजूर होने के लिए भेज दिया गया।

बुधवार 17 अक्टूबर को अकबर पर लगे आरोपों के क्रम में 20 महिला पत्रकारों ने गवाही देने की हामी भर दी थी। दूसरे शीर्ष नेतृत्व की सबसे बड़ी परेशानी लगातार सामने आ रहे नये मामले थे। मंगलवार को तुषिता पटेल ने भी एमजे अकबर पर अपने यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया था। तुषिता के आरोप के बाद एक और महिला पत्रकार सामने आई थी।

इस तरह से मंगलवार को ही अकबर पर आरोप लगाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 16 हो गई थी। इतना ही नहीं एशियन एज जैसे अखबार ने भी अकबर के खिलाफ अपना स्टैंड लेना शुरू कर दिया था। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी परेशानी मोदी सरकार की महिला मंत्रियों तथा नेताओं के लिए थी। वह एमजे अकबर पर लग रहे आरोपों के बीच में खुद को काफी असहज मान रही थी।

मानहानि का मुकदमा नहीं बचा सका

विदेश यात्रा से लौटने के बाद विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने खुद पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने वाली महिलाओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना। समझा जा रहा है कि अकबर ने ऐसा शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराकर किया था। यह एमजे अकबर की एक दबाव बनाने की कोशिश थी। केंद्र सरकार और भाजपा रणनीतिकारों को इससे मामले के ठंडा पड़ जाने की कुछ उम्मीद थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी इसके पक्ष में बयान दिया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ के दौरे के दौरान अकबर पर आरोप लगाने वाली महिलाओं के सत्यता की जांच का वक्तव्य दिया था।

क्यों हुआ मेनका गांधी का प्रस्ताव खारिज ?

एमजे अकबर के मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने रिटायर्ड जजों की चार सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा कर दी थी। लेकिन बुधवार को सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। मेनका गांधी का यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ही खारिज हुआ। इसके बाद इस तरह के कयासों को काफी बल मिल गया कि जल्द ही एमजे अकबर इस्तीफा दे सकते हैं। बताते हैं इस मामले में अंतत: खुद प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने अकबर को इस्तीफा देने के लिए कहा।

मी टू : उभर कर आई नारी शक्ति

सोशल मीडिया के स्तर से लड़ी गई सोशल मीडिया की लड़ाई अभी बहुत आगे जाने के संकेत हैं। माना जा रहा है कि कई महिलाएं और इस कतार में अपना मुंह खोल सकती हैं। राजनीति के क्षेत्र में भी अभी मी टू कैंपेन को लेकर आगे उथल-पुथल जारी रहने के संकेत हैं। भाजपा की राज्यसभा सांसद और भाजपा महासचिव सरोज पांडे के अनुसार कोई महिला यूं ही आरोप नहीं लगाती।

source-A.U.

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