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सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, आपराधिक मामलों में पीड़ित भी कर सकेगा अपील

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि आपराधिक मामलों में अभियुक्त को बरी करने के खिलाफ सरकार के अलावा पीड़ित भी ऊपरी अदालतों में अपील कर सकता है। पीड़ित को ऐसा करने के लिए अपीलीय अदालत की पूर्व अनुमति भी नहीं लेनी होगी। न्यायमूर्ति एमबी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया।

पीठ आपराधिक मामलों में अपील संबंधी सीआरपीसी की धारा 372 पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति लोकुर ने अपने और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर के फैसले में कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि धारा 372 के नियम को जीवंत किया जाए, ताकि किसी अपराध में पीड़ित को लाभ मिले। वहीं तीसरे जज न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने बहुमत के फैसले से अपनी असहमति जताई।

कामकाज के दिनों में एलटीसी लेने से परहेज करें जज : सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ जजों से कहा है कि लंबित पड़े मामलों को निपटाने में तेजी लाएं। पिछले हफ्ते वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभी जजों से संवाद करते हुए सीजेआई ने कहा कि वे अवकाश लें, लेकिन अदालतों में लंबित मामलों को निपटाने के लिए कामकाज के दिनों में एलटीसी पर छुट्टी में न जाएं। 

इसके साथ ही न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संदिग्ध जजों से न्यायिक कामकाज वापस लेने से न हिचकें।

source-A.U.
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