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बैंकर्स ने लगाया आरोप, एकीकरण के नाम पर निजीकरण की साजिश रच रही सरकार

बिलासपुर। बैंक कर्मचारियों ने एकीकरण के विरोध प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के बैनर तले आज शाम बैंकिग समय खत्म होने के बाद देशभर में विरोध किया गया। शहर में एकीकृत होकर देना बैंक, बैंक ऑफ बडौदा, विजया बैंक के विलय से बड़ा नुकसान हो रहा है। महासचिव ललित अग्रवाल, एसबीआई ऑफिसर्स फेडरेशन के डीजीएस डीके हाटी, एसबीआई वर्कमेन यूनियन के डीजीएस राजेश रावत ने कहा कि विलय से सबको नुकसान है। सभी बैंक निरंतर घाटे में जा रहें हैं, देश की अर्थनीति तबाही की ओर है। इसलिए यह लागू नहीं किया जाना चाहिए। 
बैंक ऑफ बडौदा ऑफिसर्स फेडरेशन के अनुराग बजाज, विजया बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के विनिल गुप्ता, देना बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के एम के पटसानी ने बताया कि पंजाब नैशनल बैंक भी पहले फायदे में चल रहा था, लेकिन न्यू बैंक ऑफ इंडिया का विलय होने के बाद वह भी घाटे में चला गया। उन्होंने आगे बताया कि पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किया गया, ग्लोबल ट्रस्ट बैंक ना केवल खुद घाटे में गया बल्कि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में विलय के बाद उसे भी घाटे में ले आया है। एलआईसी व आईडीबीआई का भी यही हाल होने वाला है। 2008 की वैश्विक मंदी में अमेरिका जैसे पूंजीवादी देशों की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा हो गई थी। 
                       तब राष्ट्रीयकृत बैंकों की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था सिरमौर बनी थी। हमारे देश में एकीकरण के नाम पर निजीकरण की साजिश रची जा रही है। विरोध के बाद सीजीबीईए अध्यक्ष अशोक ठाकुर व सचिव एन वी.राव ने बताया कि स्टेट बैंक पहले फायदे में चल रहा था। लेकिन सहयोगी बैंको के विलय के बाद न केवल घाटे में चला गया, अपितु एनपीए भी बढ़ गया है। एसबी सिंह, जितेंद्र शुक्ला, शरद बघेल, दीपा टंडन ने सरकार की नीतियों पर आशंका जताते हुए बताया कि एक ओर तो सरकार बैंको का विलय कर बड़ा बैंक बनाना चाहती है। दूसरी ओर नए छोटे पेमेंट बैंक को लाइसेंस भी दे रही है। मोबाईल बैंकिंग, केशलेश ट्रांजेक्शन, ई वालेट से बैंको को और छोटा करते जा रही है।
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